छत्तीसगढ़ सरकार का मॉडल अपनाएंगे मलाजखंड नगर पालिका सीएमओ लक्ष्मण सारस
मलाजखंड, बालाघाट। मलाजखंड नगरपालिका अंतर्गत 60 स्व सहायता समूह की महिलाओं को बुलाकर नगरीय क्षेत्र में आजीविका मिशन के 173 स्व सहायता समूह की महिलाओं की चिंता करते हुए मुख्य नगरपालिका अधिकारी मलाजखंड द्वारा शासन की मंशा अनुसार नगर पालिका मलाजखंड में डोर टू डोर कचरा संग्रहण का कार्य स्व सहायता समूह को देने के लिए सीएमओ लक्ष्मण सारस ने पहल की है लेकिन क्या इसके पूर्व में सीएमओ द्वारा ऐसी पहल क्यों नहीं की गई यह बड़ा सवाल खड़े कर रहा है क्योंकि जिस तरह से डोर टू डोर कचरा संग्रहण के लिए ई टेंडर जारी किए गए हैं जिसमें जानकारी अनुसार 2 लोगों के आवेदन आए थे जिसमें अभी तक टेंडर ओपन नहीं किया गया और ना ही अभी तक टेंडर निरस्तीकरण का कोई आदेश भी आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया और अब भला कैसे स्व सहायता का समूह को डोर टू डोर कचरा संग्रहण का कार्य सीएमओ द्वारा देने की बात की जा रही है। यह सब महिला सशक्तिकरण के नाम पर गड़बड़झाला समझ आ रहा है क्योंकि पूर्व में साईनाथ कंस्ट्रक्शन को 3 वर्षों से दिए गए डोर टू डोर कचरा संग्रहण का टेंडर दिया गया तब क्यों सीएमओ को स्व सहायता समूह और महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने की चिंता है नहीं हुई जो भला अब हो रही है। या फिर कोई नया है चमत्कार नगर पालिका परिषद में डोर टू डोर कचरा संग्रहण के नाम पर होने वाला है यह आगे देखने को मिलेगा और यह भी बड़ा सवाल है कि क्या सीएमओ नगरपालिका मलाजखंड को मध्य प्रदेश शासन के तर्ज के मॉडल का कोई आईडिया नहीं है जो इन्हें छत्तीसगढ़ की तर्ज के मॉडल के आधार पर डोर टू डोर कचरा संग्रहण का ख्याल आया है । यह सब जन चर्चा क्षेत्र में जोरो से हो रही है कि क्यों अभी तक निर्धारित दिनांक तक टेंडर ओपन नहीं किए गए और कम दर में डाले गए टेंडर को लागू नहीं किया गया जो अब स्व सहायता समूह को देने की बात की जा रही है और 3 वर्षों से लाखों रुपए डोर टू डोर कचरा संग्रहण के नाम पर ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के नाम पर अभी तक सीएमओ नगर पालिका द्वारा खेल खेला जा रहा था यह सब बात समझ से परे है क्योंकि जानकारी अनुसार आउटसोर्सिंग के जरिए दिए गए ऑफलाइन ठेके को ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए कैसे दे दिया गया था और अब जब कम दर में आशा स्व सहायता समूह द्वारा टेंडर डाला गया तो उसे नियमों का हवाला क्यों बताया जा रहा है या सारी मिलीभगत टेंडर ओपन होने के बाद ही समझ में आएगा सूत्रों की माने तो मध्यप्रदेश में किसी भी निकाय में आउटसोर्सिंग के जरिए ठेका नहीं दिया गया था लेकिन मलाजखंड नगर पालिका में ऐसा चमत्कार हो चुका था जिस में धूमधाम से ठेकेदार को 10 लाख से अधिक मे कचरा संग्रहण का कार्य दे दिया गया था और मजे की बात यह है कि जब ठेका दे दिया गया था तो गाड़ी नगर पालिका की क्यों लगी थी ठेकेदार द्वारा गाड़ी क्यों नहीं लगाई गई और उसने लाखों रुपए वारे न्यारे कर दिए गए और जब शिकायत हुई तो ई टेंडर निकाला गया है उसमें भी मनमर्जी तरीके से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया ताकि पूर्व में दिए गए ठेकेदार को लाभ पहुंचाया जाए और अपना भी जेब भरते रहे यह खेल नगर पालिका मलाजखंड में चलता रहा और अब ई टेंडर में फिर से भारी चमत्कार होने की संभावना दिख रही है क्योंकि विगत 3 वर्षों के सारे आय-व्यय का रिकॉर्ड खंगाला जाए तो करोड़ों रुपए का कचरा संग्रहण के नाम पर रुपए निकाला जा चुका हैं और भारी वित्तीय अनियमितता सामने आ सकती है जोकि जिला प्रशासन को जांच करना चाहिए और सरकार को अभी तक करोड़ों रुपए का कचरा संग्रहण के नाम पर सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को बंदरबांट किया गया इसकी भी जांच की जानी चाहिए कि क्यों जब निकाय द्वारा 1 वर्ष में तीन से 4 लाख रुपए में कचरा संग्रहण दिया जा रहा था तो फिर क्यों भला ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया यह भी भारी भ्रष्टाचार को इंगित कर रहा है जोकि जांच का विषय है खैर जो भी हो कचरा संग्रहण के नाम पर स्वच्छ भारत अभियान जो कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है उसे सुचारू रूप से कम खर्चे में लागू किया जाए यह क्षेत्र के लोगों की भी मांग है और विगत वर्षों में ठेकेदार को करोड़ों रुपए का दिए गए कचरा संग्रहण के ठेके की जांच की जाए तो सच सामने आ सकता है ।