बाबा साहब एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचाराधारा है - राजेश पाठक
बाबा साहब के विचारों पर काम कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सावरी में आम्बेडकर जयंती पर कवि सम्मेलन
खैरलांजी। डॉ. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचाराधारा है। जिन्होंने जिस समतामूलक समाज का सपना देखा था। उसे कालांतर में भाजपा के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय ने आगे ब?ाने का काम किया और वर्तमान में प्रधानमंत्री बाबा साहब के सपनों को आगे ब?ाकर देश के हर गरीब के रोटी, कपड़ा और मकान का सपना पूरा करने में जुटे है। यह बात डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर की 131 वीं जयंती पर खैरलांजी क्षेत्र के सावरी के माता मंदिर चौक में आयोजित कवि सम्मेलन कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के आसंदी से व्यक्त करते हुए समाज सेवी राजेश पाठक ने कही।
उन्होंने कहा कि जब देश कोरोना जैसी भयंकर आपदा में जकड़ा था। जब बेड, दवायें, ऑक्सीजन नहीं मिल रही थी, तब ना केवल देश के लोगों को स्वास्थ्य सुविधायें पहुंचाने से लेकर हर गरीब परिवारों तक दो वक्त भोजन उपलब्ध कराने का काम देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। जो बाबा साहब की हर नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन की सोच को परिभाषित करता है।
इस दौरान मंच पर सर्व ब्राम्हण समाज के महासचिव अजय मिश्रा, कार्यक्रम अध्यक्ष राकेश बनोटे, समाजसेवी मोहनलाल बनोटे,डेविस दमाहे व कार्यक्रम का मंच संचालन ग्रामीण मुकेश बंसोड़ सहित कवि साहेबलाल सरल, हलचल भोपाली, कवियित्री किरन आरजू सहित अन्य कविगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में कवि सम्मेलन को सुनने पहुंचे काव्य प्रेमी, ग्रामीण महिलायें, पुरूष एवं युवा उपस्थित थे।
डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत बाबा साहब आम्बेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर की गई। जिसके बाद अतिथि देवो भव: की परंपरा का निर्वहन करते हुए आयोजक पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश पाठक ने भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर को नमन करके उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहब के संविधान की यह सबसे बड़ी विशेषता है कि देश का हर नागरिक का वोट समान है, फिर वह बड़े से बड़े आदमी टाटा, अदाणी या अंबानी क्यो न हो या फिर ग्राम सावरी का एक किसान या आम नागरिक क्यो न हो। जिसमें हमें समझने की आवश्यकता है। 1947 में देश के आजाद होने के बाद डॉ. बाबा साहब की अध्यक्षता में संविधान समिति का गठन किया गया था। जिस कमेटी की अध्यक्षता करते हुए बाबा साहब ने तीन सालों में भारतीय संविधान का निर्माण कर उसे 26 जनवरी 1950 को लागु भी करवा दिया। जिससे ही आज गांव से लेकर दिल्ली तक का शासन और प्रशासन चलता है। जिसे कोई नकार नहीं सकता है। उन्होंने अपने संविधान में गांव के अंतिम व्यक्ति की आवश्यकता को मुहैया करवाने की व्यवस्था संविधान में की।
उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में संगठित भावना और अखंड भारत का जो उल्लेख हमें पडऩे मिलता है। वह अखंड भारत का सपना अब जल्द ही साकार होने वाला है, जिसके पूरा होने का समय अब आ गया है। जिस दिशा में देश की सरकार काम कर रही है। बाबा साहब के संविधान की यह भी विशेषता है कि उन्होंने समतामूलक समाज के साथ ही महिलाओं को भी आगे बढऩे का अवसर प्रदान किया। जिसका परिणाम है कि आज महिलायें देश की राजनीति से लेकर देश की सुरक्षा और हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी से बड़ी समस्या या विवाद संविधान के दायरे में रहकर सुलझाये जाते है।
कार्यक्रम की अतिथि सर्व ब्राम्हण समाज के महासचिव अजय मिश्रा ने कहा कि हम सभी बाबा साहब के सामाजिक समरसता के विचार को अंगीकार करें। जिनके विचार हर समाज, हर वर्ग को आगे बढ़ाने का काम करता है। बाबा साहब को किसी धर्म में बांधना अनुचित होगा। बाबा साहब किसी धर्म के व्यक्ति नहीं बल्कि वह एक विचारधारा थे। जिनके विचार आज भी प्रासंगिक है। जिन्हें हम अंगीकार करे और स्वीकार करें। आज हम सब एक साथ बैठे है, सामाजिक विचारों का आदान-प्रदान कर रहे यही तो बाबा साहब के विचार थे। उन्होंने कहा कि जिले में सावरी की जनता विषयों पर बड़ी जागरूक है। वह हर परिस्थितियों को समझती है। वह जानती है कि हमारा जनप्रतिनिधि कैसे हो, जो विकास कर सके। आज हम सभी बाबा साहब के विचारों को आगे बढ़ाने का काम करें।
मेरे तथागत का दर चाहिये...
कवि सम्मेलन में किरण आरजू सहित साहेबलाल दशरिये सरल, हलचल भोपाल और किरण आरजू ने अपनी काव्यपाठों से अतिथियों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा साहब के जीवन पर काव्यपाठ करते हुए कवियित्री किरण आरजू ने सुनाया कि क्रांति का मार्ग तुमको गया में मिला, पंचशील का असर ही विश्व भर चाहिये, ना तो जागीर मुझे, ना तो जर चाहिये, मुझे मेरे तथागत का दर चाहिये, लुम्म्बिनी में लिया जन्म महामाया से उसके दर पर सदा मेरा सर चाहिये..। इसके अलावा अन्य कवियों और कवियित्री ने अपनी काव्य रचना से कवि सम्मेलन का शमा बांध दिया।