चिटफंड पर निवेशकों के भरोसे पर खरा नहीं उतरा प्रशासन
निवेशकों के करोड़ो रूपए दिलाने में नाकाम जिला एवं पुलिस प्रशासन
बालाघाट। यु तो बालाघाट में पूर्व से ही चिटफंड कंपनियों का पसंदीदा जिला रहा है यहाँ कई चिटफंड कंपनियों ने जिले की भोलीभाली जनता की गाढ़ी कमाई को लुट कर रफूचक्कर हो चुकी है जिनके खिलाफ शिकायत व अपराध दर्ज होने के बाद भी ऐसी चिटफंड कंपनियों पर कोई क़ानूनी कार्यवाही नहीं हो पाई है और न ही प्रशासन द्वारा इन चिटफंड कंपनियों से निवेशकों को उनका पैसा वापस दिलाया गया है बालाघाट जिले में संचालित चिटफंड कंपनियों पर कार्यवाही किये जाने हेतु वर्ष 2014 में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी उक्त शिकायत पर कार्यवाही करते हुए तत्कालीन कलेक्टर भारत यादव द्वारा जांच उपरांत 9 चिटफंड कंपनियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किये थे जिसके पश्चात् जांच उपरांत वर्ष 2016 में 9 चिटफंड कंपनियों के खिलाफ बालाघाट कोतवाली में धारा 420 भादवि धारा 4 प्राइज चिट्स एवं मनी सर्कुलेशन स्कीम (बेनिंग) एक्ट 1978 एवं धारा 6 म.प्र. निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत अपराध दर्ज किया गया था किन्तु इन अपराधों में आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ़्तारी नहीं हो पाई है और न ही निवेशकों को उनका पैसा लौटाया गया है
प्रशासन ने दिखाया था निवेशकों को पैसा लौटाने का सपना
वर्ष 2014 में इन चिटफंड कंपनियों क्रमशः एसपीएनजे लैंड प्रोजेक्ट एंड डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड जय विनायक बिल्डकार्प लिमिटेड वी ग्रुप ऑफ़ कंपनी अनमोल ग्रुप स्पंदन स्फूर्ति फायनांस लिमिटेड निर्मल इन्फोकोम कारपोरेशन लिमिटेड भूमि डेवकान एंड एग्रीटेक लिमिटेड श्री साईं ग्रुप ऑफ़ कंपनी विराट डेवकॉन प्राइवेट लिमिटेड इन्फ्रा ब्यूलड़ इंडिया लिमिटेड बीएनपी ग्रुप निर्मल छाया सद्गुरु विनर सपोर्ट सिस्टम के खिलाफ शिकायत होने पर जांच उपरांत इनमे से 9 चिटफंड कंपनियों पर वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज की गई थी जिसके बाद निवेशकों से जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा उनके निवेश का पैसा लौटाने का सपना दिखाया गया एवं निवेशकों से अपील की गई वे सम्बंधित थाना या कलेक्टर कार्यालय बालाघाट में अपने निवेश से सम्बंधित दस्तावेजों को जमा करे जिसके लिए बाकायदा हेल्पडेस्क भी बनाया गया था जहाँ हजारों निवेशकों ने कलेक्टर कार्यालय बालाघाट में घंटों लाइन में लगकर इस आशा और विश्वास के साथ अपने निवेश से सम्बंधित दस्तावेजों जमा किया थे कि उन्हें उनकी मेहनत व खून पसीने की गाढ़ी कमाई का पैसा वापस मिल जाएगा किन्तु वर्ष 2016 से 2022 आ गया किन्तु उन हजारों निवेशकों की उनका वापस दिलाने में जिला एवं पुलिस प्रशासन नाकाम साबित रहा है
इनकी शिकायत पर हुई थी कार्यवाही
बालाघाट जिले में संचालित चिटफंड कंपनियों के खिलाफ बालाघाट निवासी द्वारा }kjdk नाथ चौधरी के द्वारा दिनांक 30/05/2014 प्रधानमंत्री कार्यालय समेत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड भारतीय रिजर्व बैंक एवं कलेक्टर बालाघाट के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करते हुए बताया गया था कि बालाघाट जिले में बहत सी चिटफंड कंपनियों नगरीय एवं ग्रामीणों क्षेत्रों में बिना भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों एवं बिना पंजीयन के बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कार्यों का संपादन कर जनता की भारी मुनाफा दिलाने का प्रलोभन देते हुए लगातार एजेंटों के माध्यम से कार्य कर रही है इन चिटफंड कंपनियों द्वारा कंपनी का समूह पंजीयन फाइनेंस पंजीयन शेयर बिक्री पंजीयन लैंड प्रोजेक्ट एवं डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पंजीयन कर आरडी एवं एफडी के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई लुटी जा रही है जिस पर कार्यवाही करते हुए इन चिटफंड कंपनियों पर तत्कालीन कलेक्टर के मार्गदर्शन में तत्कालीन तहसीलदार बालाघाट एवं तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी बालाघाट द्वारा संयुक्त रूप से जांच कर पाया कि इन चिटफंड कंपनियों द्वारा आरडी एवं एफडी के माध्यम से निवेशकों से करोड़ो रूपए की निवेश राशि प्राप्त की है एवं इन चिटफंड कंपनियों के पास निक्षेप राशि प्राप्त करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक एवं सम्बंधित जिले के कलेक्टर की अनुमति किसी भी कंपनी के पास नहीं है
कलेक्टर कार्यालय में धुल खा रहे निवेश के दस्तावेज !
वर्ष 2016 में 9 चिटफंड कंपनियों के खिलाफ बालाघाट कोतवाली में धारा 420 भादवि धारा 4 प्राइज चिट्स एवं मनी सर्कुलेशन स्कीम (बेनिंग) एक्ट 1978 एवं धारा 6 म.प्र. निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत अपराध दर्ज होने बाद जिला एवं पुलिस प्रशासन की अपील पर हजारों निवेशकों ने इस आशा के साथ अपने निवेश से सम्बंधित दस्तावेजों को अधिकतर रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुँच कर जमा कराए थे कि उन्हें उनकी मेहनत एवं खून पसीने के गाढ़ी कमाई का पैसा वापस मिल जाएगा किन्तु जिला एवं पुलिस प्रशासन निवेशकों के निवेश की राशि वापस कराने में नाकाम साबित हुआ है तभी तो लगभग 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक निवेशकों के निवेश की राशि उन्हें वापस नहीं मिल पाई है और सूत्र बताते है कि निवेशकों द्वारा अपने निवेश से सम्बंधित जो दस्तावेज कलेक्टर कराया में जमा कराएं गए थे वे समस्त दस्तावेज कलेक्टर कार्यालय बालाघाट के किसी कमरे में लाल कपडे में बंधे धूल खा रहे है
निवेशकों में जगाना होगा विश्वास
बालाघाट की जनता वर्षो से किसी न किसी माध्यम से चिटफंड कंपनियों की धोखाधड़ी का शिकार रही है एवं सीधी सादी होने के कारण बार बार किसी न किसी प्रलोभन का शिकार हो जाती है और फिर आशा करती है कि प्रशासन उन्हें उनका पैसा वापस दिलाने में सहयोग करे किन्तु प्रशासन हर बार जनता को उनका पैसा वापस दिलाने में असफल रहता है जिसके कारण ऐसे निवेशकों का धीरे धीरे प्रशासन से विश्वास उठता चला जा रहा है तभी तो डबल में खेल में फसे निवेशक भी जिला एवं पुलिस प्रशासन की ओर से बार बार की जा रही अपील के बाद भी अपने निवेश जानकारी देने प्रशासन के पास नहीं पहुँच रहे है जिससे प्रशासन को यह देखना होगा कि उनके द्वारा निवेशकों के बीच में कैसे विश्वास पैदा किया जावे कि बिना किसी हिचक के निवेशक प्रशासन के पास पहुँचकर अपने निवेश की जानकारी जिला एवं पुलिस प्रशासन से साझा कर सके
अब डबल का फंडा
चंद दिनों में पैसों को डबल करने का मामला इन दिनों बालाघाट जिले समेत सम्पूर्ण मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत महाराष्ट्र में सुर्ख़ियों का विषय बना हुआ है इस मामले बालाघाट जिले की लांजी व किरनापुर पुलिस द्वारा अनियमित जमा योजना प्रतिबद्ध अधिनियम 2019 की धारा 21(1) एवं 21(2) के तहत अपराध क्रमांक 177/2022 178/2022 व 151/2022 दर्ज कर अपराध में आरोपियों क्रमशः सोमेन्द्र कंकरायने तामेश मंसुरे राकेश मंसुरे प्रदीप कंकरायने हेमराज आमाड़ारे धनराज आमाड़ारे कुंदन यादव ललित वैष्णव राहुल बापुरे व अजय तिडके को जेल भेज दिया है वही अन्य आरोपियों की तलाश जारी है वही आरोपियों के पास से 10 करोड़ रूपए नकद चौपहिया वाहन समेत मोबाइल जप्त किये है