शोभायात्रा निकाल दीक्षार्थियों को कराया नगर भ्रमण, किया अभिनंदन
बालाघाट। गुरुजनों के प्रवचनों से प्रेरित होकर परिवार की सदस्यों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नगर का पूरा सुराना परिवार तप के मार्ग पर चल पड़ा है जिनकी दीक्षा 22 मई को होनी है। जिसके चलते दीक्षार्थी परिवार का अभिनंदन करने विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज 17 मई को सुबह आरती के बाद नगर के अंहिसा चौक से शोभायात्रा निकाली गई और दीक्षार्थियों को नगर भ्रमण कराया गया। नगर भ्रमण के दौरान दीक्षार्थियों का अभिनंदन किया गया। यह शोभायात्रा अहिंसा चौक से शुरु होकर राजघाट चौक, महावीर चौक, सुभाष चौक, सराफा बाजार चौक होते हुए इतवारी स्थित कार्यक्रम स्थल पहुंची। जहां मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्यक्रम आयोजित किए जिसके बाद सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
निकाली गई पालकी:
अजय लूनिया मैनेजिंग ट्रस्टी पार्श्वनाथ भवन ने बताया कि मुमुक्षु राकेश सुराना उनकी धर्मपत्नी लीना सुराना व पुत्र अमय सुराना द्वारा दीक्षा ग्रहण करने जा रहे जिसके उपलक्ष्य में शोभा यात्रा निकाली गई। जिसके बाद शाम के समय दीक्षार्थी पाश्वनाथ भवन पालकी में बैठाकर नगर भ्रमण कराकर दादावाड़ी पहुंचे, जहां भगवान की महाआरती की गई है। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन 18 को सुबह नौ बजे से पाश्वनार्थ भवन में अष्टोत्तरी महापूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसके बाद रात के समय बिदाई समारोह आयोजित किया जाएगा जो जयपुर में स्थत दीक्षा समारोह में पहुंचेंगे।
पूर्व में मां व बहन ने ली है दीक्षा:
जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि मुमुक्षु राकेश सुराना उनकी धर्मपत्नी लीना सुराना व पुत्र अमय सुराना की बड़ी बहन व उनकी मां ने भी दीक्षा ग्रहण कर तप के मार्ग को अपनाया है और अब पूरा परिवार दीक्षा ग्रहण करने जा रहा है, जो सौभाग्य की बात है। जिनका अभिनंदन करने पूरा जिला आतूर हो रहा है।
जिला ही नहीं प्रदेश का पहला मामला:
मंदिर के पदाधिकारियों ने बताया कि एक साथ पूरे परिवार के द्वारा दीक्षा लेने का मामला बालाघाट जिले का ही नहीं अपितु प्रदेश ही नहीं छत्तीसगढ राज्य का पहला मामला है। उन्होंने बताया कि तप के मार्ग पर चलने के लिए अब तक परिवार के एक दो ही लोग दीक्षा लेते थे लेकिन यह पहला मौका है जब राकेश सुराना उनकी पत्नी लीना सुराना व उनके दस वर्षीय पुत्र अमय सुराना ने एक साथ तपस्या का मार्ग अपनाया है।