बंद होने के कगार पर पहुंची 3 कक्षों वाली स्कूल में संचालित होगी सीएम राईज स्कूल

 बंद होने के कगार पर पहुंची 3 कक्षों वाली स्कूल में संचालित होगी सीएम राईज स्कूल

कई समस्याओं से ग्रसित हैं जयहिंद टॉकीज के पास संचालित हो रही पुतली शाला, डाइट स्कूल का उपयोग करें तो समस्या का निकल सकता है हल

बालाघाट। नगर मुख्यालय में आगामी कुछ दिवस पश्चात सीएम राईज स्कूल प्रारंभ होने जा रही है। लेकिन इस स्कूल के  प्रारंभ कने के लिये जिस स्कूल का चयन किया गया हैं वह बहुत ही विषम परिस्थितियों व समस्याओं से ग्रसित है। यह वह स्कूल हैं जो बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। यहां पर नाममात्र के कुछेक ही बच्चे रह गये थे। स्कूल में कई तरह की अव्यवस्था रही है। जिसके कारण यहां का स्टाप पूर्व में निलंबित भी किया जा चुका हैं। बावजूद स्कूल का चयन किया जाना सवालों में हैं। जैसे कि हिंदी माध्यम की कक्षाओं का संचालन के लिये जयहिंद टॉकीज के पास संचालित हो रही पुतली शाला का चयन किया गया है। यहां पर कक्षा 1 ली से लेकर कक्षा 8 वी तक के बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया भ्ीा करा ली गई है। चूंकि यह ऐसी स्कूल हैं जहां पर इस समय बैठक व्यवस्था ही नहीं हैं। बावजूद इस स्कूल को हिंदी माध्यम के लिये सीएम राईज स्कूल के रूप में चयन किया गया हैं। जो विचारणीय हैं। जबकि इसके बजाय चाहे तो इस समय डाइट स्कूल का चयन किया जा सकता था। जहां पर हिंदी व अंग्रेजी माध्यम की क्लास संचालित हो रही हैं। काफी बड़ा कैम्पस हैँ और फिलहाल में वहां पर ठीक सुविधायें हैं।

जयहिंद टॉकीज पुतली शाला समस्याओं से ग्रसित-

जानकारी में आया कि जयहिंद टॉकीज के पास संचालित हो रही शासकीय पुतली शाला को हिंदी माध्यम की सीएम राईज स्कूल के लिये चयन किया गया है। फिलहाल में इस स्कूल में पूरी प्रवेश की प्रक्रिया करा ली गई है। यह वह स्कूल हैं जो बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी थी। यहां पर जिस तरह की अव्यवस्था कायम हैं उसके कारण यहां से बच्चों ने पढऩे के बजाय स्कूल छोड़ दिया और वह दूसरी स्कूलों में चले गये। इसकी मुख्य वजह यह सामने आयी कि यहां पर पर्याप्त कक्ष नहीं है। महज 3 कक्ष हैं जिसमें ही बच्चों को पढ़ाने की सुविधा है। बिल्डिंग की छत टीन की हैं लेकिन कुछ स्थान पर टपकते रहती हैं। नगरपालिका के अधीन यह स्कूल हैं लेकिन इसके व्यवस्था की ओर किसी का ध्यान नहीं है। प्रसाधन घर की व्यवस्था है पर सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। चपरासी या कोई भृत्य नहीं है। एक तरह से नपा के सफाई अमला पर यह स्कूल निर्भर हैं। स्कूल के स्टाप के लिये भी पर्याप्त बैठक कक्ष नहीं है। ऐसे में आफिस के दस्तावेजों का रख-रखाव से लेकर अन्य व्यवस्था की समस्या पहले से ही बनी हुई है। जानकारी में आया कि यहां पर मुख्य समस्या यह हैं कि आसपास थोक कारोबारी के बड़े व छोटे वाहनों की आवाजाही होती है। दिनभर लगेज उतरते व चढ़ते रहता है। जिसके कारण वाहनों के आवाजाही की आवाज गूंजती रहती है। इसके अलावा वही पर मजदूरों के ठहरने का स्थान हैं। जिसके कारण उनके भी आवाज गूंजती हैं। दूसरी ओर ज्ञात हुआ हैं कि कुछ शरारती तत्वों का जमावड़ा रहता हैं तो शराब, ताशपत्ती, बिड़ी व सिंगरेट की शौक ाके वही पर पूरा करते हैं। बच्चों के लिये पूरी तरह से सुरक्षित स्थान नहीं हैं। निकट में ही तालाब हैं। जिसकी अव्यवस्था व बदबू किसी से छुपी नहीं है। महत्वपूर्ण यह कि यहां पर आने वाले बच्चों को शहर के मध्य से आना पड़ेगा। जो कि उन्हें सुलभता से आववागमन वाला मार्ग से ही जुड़कर इस स्कूल का केम्पस हैं। यहां की स्कूल में अव्यवस्था के कारण तत्कालीन कलेक्टर पूरे स्टाप को निलंबित कर चुके हैँ। शौचालय से लेकर अन्य व्यवस्था को लेकर देख रेख नहीं हैं। पेयजल की समस्या भी बनी हुई हैं। जो इस स्कूल का सीएम राईस हिंदी माध्यम के लिये उपयोग करना सवालों में हैं। साथ ही अभिभावक भी बच्चों के प्रवेश कराने के बाद चिंता की स्थिति में आ गये हैं।

कक्षा 1 से कक्षा 8वी माध्यम का होना हैं संचालन

शासकीय पुतली शाला जयहिंद टॉकीज के निकट में सीएम राईज की कक्षा पहली से लेकर कक्षा आठवी तक हिंदी माध्यम की कक्षाओं का संचालन होना हैं। लेकिन यहां पर महज 3 ही कक्ष हैं। जो कि दो शिफ्ट नियत करने के बाद भी पूरी तरह से संचालित होने में दुविधा दिख रही है। बच्चों को किस तरह से बैठाया जायेगा यह गंभीर मामला हैं। जानकारी में आया कि प्रत्येक कक्षा में कम से कम 40 बच्चों का प्रवेश है। इस प्रवेश के चलते निश्चित ही बच्चों की दर्ज संख्या कक्षा आठवी तक में 320 से 350 के आसपास होगी। जब यहां प बैठने की व्यवस्था ही नहीं हैं तो प्रवेश लेने वाले बच्चों को सीएम राईज स्कूल के नाम पर कहां बिठाया जायेगा? यह दुविधा वहां के स्कूल महिला स्टाप को भी चिंता में डाल रहा है। वही अब जब अभिभावकों को यहां की अव्यवस्था के संबंध में ज्ञात हो रहा हैं तो वह बच्चों के प्रवेश कराने के बाद चिंतित हो गये है। सभी जानते हैं कि सीएम राईज स्कूल की बिल्डिंग बनने में कम से कम 3 से 5 साल का समय लग सकता हैं? इस तरह की अवधि भवन बनने में लगेगी तो निश्चित ही बच्चों के बैठने को लेकर लंबे अंतराल तक की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत हैं।

डाइट स्कूल का किया जा सकता है उपयोग-

जानकारी में आया कि जिला प्रशासन चाहे तो सीएम राईज स्कूल हिंदी माध्यम के लिये रानी दुर्गावती स्कूल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के चलते जयहिंद टॉकीज स्कूल के पास की स्कूल में ना करते हुये डाइट स्कूल का उपयोग करने पर विचार करने चाहिये। डाइट स्कूल का उपयोग करने पर प्रशासन को कई तरह की समस्याओं से फिलहाल में छुटकारा मिल जायेगा। चूंकि डाइट के आसपास एमएलबी स्कूल, गल्र्स कालेज सहित छात्रावास का संचालन हैं। इसके अलावा बीआरसी कार्यालय का संचालन हैं। डाइट में ही इस समय कुछ कक्षाओं का संचालन हिंदी व अंग्रेजी माध्यम से हो रहा हैं। यहां पर एक तरह से बच्चों के बैठक से लेकर अन्य सुविधायें हैं। जो बच्चों को लाभदायक रहेगी। इसके अलावा सबसे बड़ी राहत बच्चों को अच्छा केंपस मिल जायेगा। जयहिंद टॉकीज के निकट की वाहनों की कर्कस आवाज, सामानों को उतारने व चढ़ाने की दिनभर हलचल, हमालों व मजदूरों की उठक-बैठक, शरारती तत्वों की अवांछनीय हरकतें से निजात मिल जायेगी। बच्चों को शहर के भीतर भारी भीड़ भरे माहौल से आवागमन करने में राहत मिल जायेगी। साथ ही जयहिंद टॉकीज पुतली शाला की जो पूर्व से खराब छवि हैं उससे भी निजात मिल जायेगी। यह पहल जिला प्रशासन को करने की जरूरत है। जिला मुख्यालय में सीएम राईज स्कूल हिंदी माध्यम के संचालन में प्रारंभ में ही इस तरह से विविध समस्याओं से ग्रसित स्कूल का चयन करना अपने आप में गंभीर मामला हैं। पर इस विषय से अभिभावकों व उनके बच्चों को सीएम राईज स्कूल के नाम अच्छा माहौल व स्कूल उपलब्ध कराकर उनकी चिंता से मुक्त भी करा सकते हेँ। जिला प्रशासन को स्वयं भी इस संबंध में निरीक्षण करने की जरूरत हैं।

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