वरिष्ठा सर्जिकल डॉ अर्पण चतुरमोहता ने स्त्री् रोग संबंधी कैंसर के उपचार में दिये नए अपडेट
बलाघाट। संजीवनी सीबीसीसी यूएसए कैंसर अस्पताल के वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ अर्पण चतुरमोहता ने स्त्री रोग संबंधी कैंसर के उपचार में नए अपडेट के परिणाम स्वरूप कैंसर मरीजों के सर्वाइवल रेट ;जीवित रहने की दर में सुधार आने के बारे में अपनी अंतर्दृष्टि साझा की।
डॉ अर्पण ने कहा कि हर साल 800,000 से अधिक नए मामलों के साथए कैंसर एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है। भारत में महिलाओं में लगभग 50 से 70: कैंसर चार अंगों, गर्भाशय ग्रीवा ;सर्विक्स गर्भाशय यूटरस अंडाशय;ओवरी और स्तन; ब्रेस्ट में होता है। हालांकि 70: मामलों का निदान एडवांस्ड स्टेज में किया जाता है। कम उम्र में शादी जल्दी बच्चे पैदा करना, मल्टी पैरिटी ;एक से अधिक बार बच्चे पैदा किया होना, जेनिटल हाइजीन ;जननांगों की सफाई पर ध्यान न देना, और खत्म ना होने वाले एसटीडी, सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारक हैं।
उन्होंने बताया कि 30 से 65 साल की उम्र में हर पांच साल में एक बार सर्वाइकल कैंसर के लिए नियमित जांच प्रक्रिया की सिफारिश की जाती है। एचपीवी से जुड़े कैंसर को टीकाकरण की मदद से काफी हद तक खत्म किया जा सकता है। पेट में दर्द, अनियमित मासिक धर्म रक्तस्राव; मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग, पीठ दर्द, कब्ज; कॉन्स्टीपैशन, थकान, और बिना वजह वजन कम होनाए सर्वाइकल और ओवेरियन कैंसर के कुछ सामान्य लक्षण हैं। स्तन में अगर कोई भी गांठ ;छोटी या बड़ी हो तो उसे सोनोग्राफी या सुई की जांच करानी चाहिए। 40 वर्ष के उपर हर महिला को स्क्रीनिंग सोनोमेमोग्राफी करानी चाहिए ताकि स्तन के उन कैंसरो का जल्दी इलाज हो सके, जिनके ठीक होने कि संभावना 80: से अधिक हो।
डॉ अर्पण चतुरमोहता ने 4 वर्ष पूर्व इटली से सीआरएस एवं सीआरएस-एचआईपीईसी में फेलोशिप के सहायता से उत्कृष्ट अनुवर्ती परिणामों ;फॉलोअप रिजल्ट,और प्रोग्नोसिस ;डॉक्ट री अनुभव के आधार पर रोग का पूर्वानुमानय पूर्वलक्षण, के साथ 100 से अधिक सीआरएस एवं सीआरएस-एचआईपीईसी सर्जरी की हैं। उन्होंने बताया कि आजकलए सीआरएस ;साइटोरडक्टिव सर्जरी और इंट्रा एब्डॉमिनल कीमोथेरेपी (एचआईपीईसी) देना एक बहुत एडवांस्ड तकनीक हैए जो ओवेरियन कैंसरए पेरिटोनियल कैंसरए मेसोथेलियल कैंसर एवं एडवांस्ड कोलोरेक्टल कैंसर में बेहतर पोस्ट ट्रीटमेंट सर्वाइवल ;जीवित रहने की दर के लिए मददगार साबित पाए गए हैं।
उन्होंने साझा किया कि नियमित रूप से लेक्रोस्कोपिक रेडिकल हिस्टेरेक्टॉमी एवं एडोमेट्रियल कैंसर के लिए पूर्ण नोडल डाईसेक्शन ;विच्छेदन जैसे अत्याधुनिक तकनीकों से कैंसर मरीजों को बेहतर ट्रीटमेंट और लंबे समय तक कैंसर मुक्त जीवन देने में सहायता मिलेगी।
डॉ अर्पण ने स्तन कैंसर के इलाज में आधुनिक तकनीकी अपडेट के बारे में बताते हुए साझा किया की फ्रोजन सेक्शन एवं ब्रेस्ट ऑकोप्लास्टी की मदद से संजीवनी सीबीसीसी में 2500 मामलों का इलाज किया जा चुका हैए जिसके उपयोग से स्तन को बचाया जा सकता है और कैंसर को सम्पूर्ण तरीके से निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि कैंसर के लक्षण आने पर डॉक्टरी परामर्श के पश्चात आधुनिक तकनीकों का लाभ लेकर बेहतर एवं जल्द कैंसर इलाज का फायदा लिया जा सकता है।