मलेरिया व डेंगू नियंत्रण पर छात्र-छात्राएं भी निभाएंगे अपनी भूमिका

 मलेरिया व डेंगू नियंत्रण पर छात्र-छात्राएं भी निभाएंगे अपनी भूमिका



बालाघाट। मलेरिया व डेंगू पर नियंत्रण करने के लिए अब स्कूली छात्र-छात्राएं भी भूमिका निभाएंगे। इसके लिए जिला स्वास्थ्य समिति बालाघाट और गोदरेज इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित एंबेड परियोजना फैमिली हेल्थ इंडिया द्वारा शासकीय स्कूलों में जाकर छात्रों को मलेरिया व डेंगू से बचाव करने जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मलेरिया व डेंगू नियंत्रण के लिए छह तहसीलों के 52 स्कूलों में छात्रों तक यह जानकारी शिविर लगाकर दी गई है। दरअसल,आदिवासी क्षेत्र में अधिकांश लोग साफ सफाई पर ध्यान नहीं देते है।जिसके चलते एंबेड परियोजना द्वारा स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं को मलेरिया व डेंगू बीमारी से बचाव के बारे में विस्तार से समझाइश दे रहे है। ताकि वे घर में जाकर अपने माता पिता के अलावा आसपास के लोगों व अपने दोस्तों को इसके संबंध में बता सके।

लंबे समय तक पानी न रखें: एंबेड परियोजना के कर्मचारियों द्वारा आदिवासी क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को मलेरिया व डेंगू नियंत्रण के लिए जानकारी देते है। लेकिन इसके बाद भी अधिकतर लोग वर्षा के पानी को लंबे समय तक पुराने बर्तनों में जमा रखते है। इससे मच्छर पनपने से मलेरिया व डेंगू फैलने की संभावना बनी रहती है।इसीलिए स्कूलों में जाकर छात्रों को इससे बचने के तरीके बताए जा रहे है।यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनोज पांडेय के निर्देशन एवं जिला मलेरिया अधिकारी डा. मनीषा जुनेजा के मार्गदर्शन में जिला स्वास्थ्य समिति बालाघाट एवं गोदरेज इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित एंबेड परियोजना फैमिली हेल्थ इंडिया द्वारा किया जा रहा है।

नारंगी स्कूल में बच्चों को दी जानकारी: 

शासकीय माध्यमिक विद्यालय नारंगी में मच्छरजनित रोगों के उन्मूलन के लिए एंबेड परियोजना के अंतर्गत मलेरिया व डेंगू को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिसमें विद्यालय के सभी छात्रों सहित समस्त शिक्षकों ने भाग लिया।छात्रों को समझाया गया कि मलेरिया व डेंगू मच्छर के काटने से होता है,इसलिए जरूरी है की मच्छर के संपर्क में आने से बचें।साथ ही घरों के आसपास जल एकत्रित ना होने दें और पानी की टंकियों को ढककर रखे।जिससे की हम मलेरिया व डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियों से बच सके।कार्यक्रम में मलेरिया व डेंगू के कारण, लक्षण एवं बचाव के बारे में भी छात्रों को बताया।छात्रों को मच्छर से बचने मच्छर रोधी साधनों का उपयोग करने के बारे में विशेष रूप से बताए।

नियमित करें मच्छरदानी उपयोग: 

जिला समन्वयक फैमिली हेल्थ इंडिया कंचन सिंह ने छात्रों को समझाया कि मानसून काल मच्छरों के प्रजनन लिए अनुकूल रहता है। इस समय मच्छर ज्यादा पनपते हैं और बीमारियां फैलाते है। इसीलिए घर के आसपास पानी जमा ना होने दें। अगर कहीं पानी जमा हो रहा है तो निकासी करवाएं मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें। मच्छरों को संपर्क में आने से बचें और अगर मलेरिया या डेंगू के लक्षण दिखे तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में या ग्राम की आशा कार्यकर्ता से संपर्क करें और पूर्ण इलाज लें।एंबेड परियोजना के बीसीसीएफ रमेश चौधरी ने छात्रों को सही ढंग से मच्छरदानी लगाने एवं नियमित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों को मच्छरदानी लगाकर प्रदर्शन करते हुए छात्रों जानकारी दी और नियमित रूप से उपयाग करने को कहा गया। छात्रों ने भी अपने सवाल पूछे और मलेरिया से जुड़ी भ्रांतियों और संदेहों को दूर किया और कहा कि अपने घर परिवार व दोस्तों के साथ यह जानकारी जरूर साझा करेंगे।

मुख्य बिंदु -

- बिरसा, परसवाड़ा, लांजी, किरनापुर, बैहर व लामता क्षेत्र में मलेरिया प्रभावित गांव।

- 155 गांव मलेरिया प्रभावित।

- एंबेड परियोजना चला रही गांव-गांव में अभियान।

- स्कूलों में जाकर छात्रों को बता रहे मलेरिया व डेंगू से बचने के तरीके।

- मलेरिया व डेंगू से बचने आसपास नहीं रखे पानी जमा।

- पुराने बर्तनों का कर दे पानी खाली।

- लार्वा को करें नष्ट।

- रोज रात में मच्छरदानी लगाकर सोए।

- अपने घर व आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी।

इनका कहना

मलेरिया व डेंगू पर नियंत्रण के लिए गांवों में शिविर के अलावा घर-घर जाकर लोगों को पुराने बर्तनों में पानी नहीं रखने, लार्वा नष्ट करने की प्रक्रिया समझाइश दे रहे है।साथ में स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं को मच्छरदानी का प्रदर्शन बताकर अपने माता पिता व आसपास मलेरिया व डेंगू से कैसे बचाव करना इससे अवगत कराते है।ताकि मलेरिया व डेंगू पर नियंत्रण पा सके।

कंचन सिंह, जिला समन्वयक, फैमिली हेल्थ इंडिया।

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