मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र मार्ग 77 घंटे बाद हुआ शुरू

 मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र मार्ग 77 घंटे बाद हुआ शुरू



बालाघाट। बालाघाट जिले में शनिवार से लगातार सोमवार तक हुई वर्षा से नदी नाले उफान पर रहे।बाढ़ का पानी अनेक गांवों में घुसने से एक सैकड़ा से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो गए।खेतों में पानी घुसने से धान की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई।इधर,मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र राज्य को जोडऩे वाला मोवाड़ की बावनथड़ी नदी पर बना पुल बुधवार को 11 बजे यानी 77 घंटे बाद शुरु हो गया।तीन दिन की वर्षा में लांजी, खैरलांजी, कटंगी व तिरोड़ी क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है।बाढ़ से जिले भर में अनुमानित 15 सौ एकड़ धान की फसल नष्ट हो गई।

लांजी के ग्राम उमरी के किसान संतोष हरिनखड़े, गणेश पटले, कारूलाल हरिनखेड़े ने बताया कि शनिवार से लगातार वर्षा शुरु हुई।इससे शाम को बाघ नदी में पानी बढऩे से खेतों में 15 दिन पहले लगाई हुई धान तीन दिन तक डूबी रही।जिससे करीब 200 एकड़ में लगी धान गलने लगी है।किसानों को इससे काफी नुकसान उठाना पड़ा है और परिवार की जीविका चलाने में परेशनियों का सामना करना पड़ेगा।इसके अलावा सावरी, लाड़सा, चिखलामाली, देवलगांव,सिंगोला, नीलागोंदी सहित अन्य गांवों में भी यही हाल है।उमरी में 150 किसानों को नुकसान हुआ है।किसान उम्मेदराज पटले, सोहनलाल पटले,दिनेश पटले,सतेश हरिनखेड़े,धनसिंह हरिनखेड़े सहित अन्य किसानों ने शासन शासन प्रशासन से मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।

लांजी क्षेत्र में बाढ़ का पानी उतरते ही आवागमन हुआ बहाल:

लांजी क्षेत्र में तीन दिनों में हुई अतिवृष्टि एवं रुक-रुक कर हुई बारिश के चलते बाढ़ आपदा की स्थिति बनने के बाद 16 अगस्त की शाम से रास्ते खुलने के बाद आवागमन बहाल हो गया एवं जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है।17 अगस्त की सुबह से ही पंचायतों एवं रिश्तेदारों के यहां रुके बाढ़ प्रभावित ग्रामों के लोग अपने घरों की ओर लौट गए एवं पालतू पशुओं के लिए उनके भोजन एवं बांधने का प्रबंध करते नजर आए।इतना ही नहीं जिन गांव एवं टोलों के घर डूब में आ गए थे वह भी अपने घर गृहस्थी की व्यवस्था बनाने लगे है।ग्राम पंचायतों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के रिकर्ड भींग गए वह दिन भर उन्हें सूखा कर व्यवस्थित करते रहे।हालांकि बाढ़ आपदा के चलते बहुत से कच्चे मार्गों की हालत जर्जर हो गई है।

इतना हुआ नुकसान:

अतिवृष्टि के चलते व बाढ़ आपदा के कारण सबसे ज्यादा खेती किसानी प्रभावित हुई है।लगभग 23 ग्रामों में हजार एकड़ से ज्यादा की फसल नुकसानी का आकलन लगाया जा रहा है। सावरी, उमरी, चिखलामाली में सबसे ज्यादा धान फसल के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। बाघ नदी का पानी खेतों में आने से यहां 900 एकड़ धान के रोपे या तो पानी में डूब गए या रेत मिट्टी आने से खराब हो गई है।किसानों ने बताया कि वैसे भी धान की रोपाई लेट हुई।ऊपर से बाढ़ की आफत आ गई है।फसल बीमा का लाभ मिल पाएगा कि नहीं यह भी भविष्य के गर्त में है।अतिवृष्टि से फसल क्षति के आकलन के लिए तहसीलदार सतीश चौधरी ने सर्वे के लिए पटवारियों को निर्देशित किया है।

जहरीले जीव जंतु का सता रहा डर:

अतिवृष्टि एवं बाढ़ के बाद पानी तो उतरने लगा है।किंतु बाढ़ के पानी में बहाकर आए जहरीले सांप, बिच्छू के खेतों व घरों के आसपास निकलने से इनका भय बरकरार बना हुआ है।ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के बाद लगातार सांप बिच्छू निकल रहे है।

अतिवृष्टि बाढ़ से कच्चे मकान गिरे: बाढ़ की स्थिति निर्मित होने से क्षेत्र में लगभग एक सैक ड़ा मकान प्रभावित हुए हैं। इसमें कुछ शासकीय भवन भी है। लेकिन अनेक कच्चे मकान गिरने, झोपड़े व जानवर बांधने वाले कोठे के गिरने हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगेगा स्वास्थ्य शिविर: मौसम के साफ होते ही जहां जनजीवन बहाल हो गया है।वहीं यहां के लोगों के स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाएंगे।जनपद उपाध्यक्ष अजय अवसरे ने बताया कि देवलगांव, लाड़सा, उमरी, सावरीकला, चिखलामाली, मोहझरी, बापड़ी, परसोड़ी, दहेगांव के नागरिकों एवं बाढ़ प्रभावित ग्रामों के लोगों के लिए जल्द ही स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा।

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