ग्रामीण को शाम को किया अगवा, सुबह घर छोड़ गए नक्सली
बालाघाट। बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों द्वारा ग्रामीणों के बीच अपनी दहशत बनाने और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच संवाद स्थापित न हो, इसके लिए ग्रामीणों को अगवा कर ले जाने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। वहीं, ऐसे मामलों में कई बार नक्सली मुखबिरी के शक पर नक्सलियों की हत्या कर देते हैं तो कई बार उन्हें दलम में शामिल करने के लिए ले जाते हैं और कुछ मामलों में मीटिंग में शामिल करने व पूछताछ के बाद छोड़ देते हैं। नक्सलियों द्वारा एक ग्रामीण को अगवा करने का मामला बीती शाम कोरका-बोंदारी में सामने आया है।
करीब 30 की संख्या में थे हथियारबंद नक्सली
मिली जानकारी के अनुसार बालाघाट का नक्सली कमांडर विकास नगपुरे समेत अन्य 30 हथियारबंद नक्सली अति नक्सल प्रभावित गांव कोरका-बोंदारी पहुंचे और यहां से उन्होंने ग्रामीण अश्रु धुर्वे को अपने साथ लेकर चले गए। इसकी जानकारी पुलिस को लगते ही पुलिस भी अलर्ट हो गई और मामले की तफ्तीश में जुट गई। वहीं आज 31 अगस्त की अलसुबह की नक्सलियों ने ग्रामीण को उसके घर पर छोड़ दिया है, जिससे न सिर्फ परिजन बल्कि ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है। मिली जानकारी के अनुसार नक्सलियों ने कुछ साल पहले ही असरु के भाई कार्तिक की भी मुखबिरी के शक पर हत्या कर चुके हैं, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है।
गांव में फेंके गए नक्सली पर्चे
ग्रामीण का अगवा करने के साथ ही नक्सलियों ने गांव में नक्सली पर्चे भी फेंके हैं, जिसमें उन्होंने पुलिस की मुखबिरी करने पर सजा दिए जाने की बात लिखी है और मालखेड़ी में हुई दो हत्याओं से सबक लेने की बात कहकर पुलिस का सहयोग न करने की बात लिखी है, जिसकी जिम्मेदारी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के जीआरबी डिवीजन कमेटी ने ली है।
जंगल में की गई तलाशी
बीती शाम नक्सलियों द्वारा कोरका-बोंदारी गांव से एक ग्रामीण को घर से ले जाने की जानकारी हमें भी प्राप्त हुई थी, जिसके बाद से ही लगातार मामले की विवेचना करने के साथ ही जंगल में सर्चिंग तेज की गई है। वहीं, आज सुबह सूचना प्राप्त हुई है कि ग्रामीण सकुशल अपने घर लौट गया है। नक्सली अपनी बातों को मनवाने के लिए इस तरह की दहशत फैलाने का काम करते है और कई बार पूछताछ करने के बाद छोड़ भी देते है। -संजय सिंह, एडीजी, बालाघाट जोन