13 बीट में 18 कर्मचारी 5 बंदूकों के सहारे कर रहे गश्त
बालाघाट. 13 बीट और 18 कर्मचारी। इन 18 कर्मचारियों के पास पांच बंदूकें और एक रिवाल्वर। इतने कम अमले में दो दर्जन से अधिक बाघों सहित अन्य वन्य जीवों की कैसे होगी निगरानी वन्य जीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर अब वन अमला कम पडऩे लगा है। मामला जिले के लालबर्रा क्षेत्र के कान्हा-पेंच कॉरिडोर का है।
जानकारी के अनुसार लालबर्रा क्षेत्र में कान्हा-पेंच कॉरिडोर में लगातार वन्य जीवों की बढ़ोत्तरी हो रही है। खासतौर पर बाघ का मूवमेंट ज्यादा हो रहा है। बाघों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है। लेकिन वन्यजीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए अमला कम पडऩे लगा है। इधर, वन्य जीव लगातार कान्हा-पेंच कॉरिडोर क्षेत्र में पालतु मवेशियों का शिकार कर रहे हैं। वहीं हाल ही में बाघ ने पंडरापानी के जंगल में हमला कर एक युवक को मार डाला। जबकि करीब दो माह पूर्व भांडामुर्री क्षेत्र में भी बाघ ने हमला कर एक व्यक्ति को अपना निवाला बना लिया था। इसके बाद से इस क्षेत्र में लगातार वन्य जीवों से ग्रामीणों की सुरक्षा किए जाने की मांग उठने लगी है। लेकिन वन विभाग के पास अमला कम होने के कारण वे समय-समय पर गश्त नहीं कर पा रहे हैं और न ही गांवों में ग्रामीणों को अलर्ट। जबकि वन्य जीवों द्वारा एक-दो दिनों के अंतराल में पालतु मवेशियों का शिकार भी कर रहे हैं। खासतौर पर बहियाटिकुर, सोनवानी, खैरगोंदी, नवेगांव क्षेत्र में वन्य जीवों द्वारा पालतु मवेशियों का शिकार करने की घटनाएं अधिक हो रही है।
कर्मचारी अधिक, हथियार कम
लालबर्रा क्षेत्र में कान्हा-पेंच कॉरिडोर में लगाताार बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बावजूद इसके विभाग द्वारा यहां पर पर्याप्त कर्मचारियों की पदस्थापना नहीं की जा रही है। इतना ही नहीं शासन से मिले हथियारों की संख्या कम है, जबकि अमला अधिक है। वन विभाग के पास लालबर्रा क्षेत्र में पांच बारह बोर की बंदूके और रिवाल्वर है। वहीं एक ही जीपीएस सिस्टम है। जबकि कन्हा पेंच कॉरिडोर अंतर्गत 13 बीट आते हैं। जिसके लिए 13 बीटगार्ड, 4 डिप्टी रेंजर और 1 रेंजर पदस्थ है। ऐसे में इन कर्मचारियों द्वारा कैसे वनों की गश्त, सुरक्षा की जाती होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
बाइक, एक चौपहिया वाहन से करते हैं गश्त
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार टेकाड़ी, खैरगांव, अंतरा बेरियर क्षेत्र में वन विभाग द्वारा लगातार गश्त की जा रही है। इसके अलावा भांडामुर्री, जाम, बहियाटिकुर, बगदेही, सेलवा, टेंगनीखुर्द, डोहरा, खैरगोंदी, सिलीझरी सहित अन्य क्षेत्रों में वन अमला द्वारा पैदल गश्त की जाती है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सभी के द्वारा बाइक और एक चौपहिया वाहन से गश्त की जाती है। लेकिन जंगलों में पहुंचने के बाद अधिकांशत: पैदल ही गश्त करते हैं। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा लगातार गश्त नहीं की जा रही है।
किसी भी बीट में नहीं है सीसीटीवी कैमरा
लालबर्रा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 13 बीटों में कहीं भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। ऐसे में वन्य जीवों का अवैध शिकार होने की संभावना प्रबल हो जाती है। जबकि कान्हा-पेंच कॉरिडोर होने और बाघों की संख्या अधिक होने के चलते यहां पर सीसीटीवी कैमरा होना आवश्यक है।
इनका कहना है
लालबर्रा वन परिक्षेत्र में 13 बीट है। जिसमें कुल 18 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत है। सुरक्षा के लिए शासन द्वारा 5 बंदूके और एक रिवाल्वर प्रदान की गई है। कान्हा-पेंच कॉरिडोरी में कहीं भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। परिक्षेत्र के कुछेक जंगल से लगे गांवों में वन्य जीवों द्वारा पालतु मवेशियों का शिकार किया जाता है। वनों, वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए अमले में बढ़ोत्तरी होना चाहिए।
-हर्षित सक्सेना, रेंजर, वन विभाग लालबर्रा