बालाघाट में सीबीआइ ने ताम्र परियोजना मलाजखंड में की दस्तावेजों की जांच, 280 करोड़ रुपये की लागत से लगना था संयंत्र

 बालाघाट में सीबीआइ ने ताम्र परियोजना मलाजखंड में की दस्तावेजों की जांच, 280 करोड़ रुपये की लागत से लगना था संयंत्र



बालाघाट। ताम्र परियोजना मलाजखंड में रा मटेरियल का संयंत्र स्थापित करने के नाम पर किए गए भ्रष्टाचार पर सीबीआइ ने शिकंजा कसा है। ताम्र परियोजना में रविवार को दस्तावेजों की जांच करने सीबीआइ की चार सदस्यीय टीम पहुंची। टीम ने यहां पर गड़बड़ी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। जांच में कुछ जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं। सीबीआइ ने दो दिन पहले भिलाई में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के दो पूर्व सीएमडी और कार्यकारी निदेशक सहित हिंदुस्तान कापर लिमिटेड के पांच अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

280 करोड़ की लागत से तैयार होना था संयत्र :

ताम्र परियोजना मलाजखंड में वेस्ट रेत और मिट्टी से सोना सहित अन्य धातु निकालने 280 करोड़ रुपये की लागत से संयत्र स्थापित करने योजना थी। संयत्र की स्थापना के लिए मेसर्स स्टार ट्रेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चेन्नई को 24 फरवरी वर्ष 2017 में नियम विरुद्ध तरीके से सिंगल टेंडर पर ही ठेका दे दिया था। इसमें करीब 170 करोड़ रुपये लगाने के लिए और अन्य खर्च के लिए करीब 110 करोड़ रुपये शामिल हैं। टेंडर के बाद मेसर्स स्टार ट्रेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चेन्नाई को सीएमडी रहते संतोष शर्मा ने करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था। जबकि भुगतान की गई राशि के एवज में मौके पर उतना कार्य नहीं हुआ था। भुगतान प्राप्त करने के बाद कंपनी ने काम बंद कर दिया। इस कंपनी को बचाने के लिए 1.44 करोड़ रुपये का सलाहकारी ठेका मेसर्स एमएन दस्तूर चेन्नाई को दिया गया था। इस तरह से पूर्व सीएमडी संतोष शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने पद में रहते हुए आर्थिक अनियमितता की थी।

बंद करना पड़ा प्लांट :

ताम्र परियोजना में कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिससे यह पता चलता है कि ताम्र परियोजना के तत्कालीन सीएमडी कैलाश धर दीवान ने तत्कालीन निदेशक आपरेशन संतोष शर्मा, तत्कालीन एजीएम विवेक गुप्ता के साथ मिलकर साजिश की।इसके बाद उन्होंने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए एसटीपीएल चेन्नाई को खेतड़ी कापर कांप्लेक्स के पायलट प्लांट में टेलिंग्स से धातु निकालने के लिए गलत तरीके से टेंडर दे दिया। जांच में यह भी पता चला कि सोने, चांदी और सिलिका जैसी धातुओं की वांछित मात्रा नहीं मिलने से पायलट प्लांट बंद करना पड़ा।

75 लाख रुपये ताम्र परियोजना ने रोक रखी :

सीबीआइ द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में पूर्व सीएमडी संतोष शर्मा और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दिलीप महाजन जांच के दायरे में आए थे। इसके चलते डायरेक्टर दिलीप महाजन को बर्खास्त कर दिया गया था। जबकि सीएमडी संतोष शर्मा के एचसीएल से सेवानिवृत्त होने के बाद करीब 75 लाख रुपये एचसीएल ने रोक रखी है।

रची गई थी साजिश :

प्राथमिक जांच में पता चला कि तत्कालीन सीएमडी कैलाश धर दीवान ने कथित तौर पर तत्कालीन निदेशक आपरेशन संतोष शर्मा, तत्कालीन एजीएम विवेक गुप्ता और विनय कुमार सिंह, तत्कालीन डीजीएम प्रोजेक्ट्स के साथ मिलकर खेतड़ी में पायलट प्लांट चालू होने से पहले मलाजखंड में एक कमर्शियल वाणिज्यिक संयंत्र की स्थापना के लिए साजिश रची थी।

इन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआइआर :

सीबीआइ ने एचसीएल के तत्कालीन सीएमडी कैलाश धर दीवान और पूर्व कार्यकारी निदेशक सामग्री और अनुबंध दिलीप कुमार महाजन, महाप्रबंधक परियोजना विनय कुमार सिंह, तत्कालीन निदेशक संचालनद्ध और पूर्व सीएमडी संतोष शर्मा और तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विवेक गुप्ता सहित अज्ञात लोगों के खिलाफ शाजिश व धोखाधड़ी के साथ-साथ आपराधिक कदाचार से जुड़े भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। इसके बाद अब सीबीआइ 2013 से तत्कालीन सीएमडी संतोष शर्मा के कार्यकाल के दौरान 2019 मलाजखंड और खेतड़ी राजस्थान में पीएसयू द्वारा जारी किए गए विभिन्ना अनुबंधों के संबंध में हुई कथित अनियमितताओं और कदाचार के बारे में जांच करेगी।

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