पुस्तक यात्रा की पूर्व संध्या पर कवि गोष्ठी
बालाघाट। विश्व रंग कार्यक्रम के तहत वनमाली सृजन पीठ एवं रवीद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी भोपाल से प्रारंभ होकर बालाघाट पहुँची। पुस्तक यात्रा की पूर्व संध्या पर लीलावती इंस्टीटयृट बालाघाट मे एक काव्य संध्या का आयोजन वनमाली सृजन केन्द्र बालाघाट द्वारा आयोजित किया गया।
उक्त कार्यक्रम में अध्यक्ष के रूप प्रो.एल.सी.जैन पूर्व प्राचार्य शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालाघाट, मुख्य अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती अनुभा मुंजारे, विशिष्ट अतिथि जिले के वरिष्ठ साहिहत्यकार श्री राजाराम भारद्वाज तथा लीलावती इंस्टीटयूट एवं आईसेक्ट के जिला प्रबंधक श्री संजीव वाजपेयी एवं वनमाली सृजन केंद्र बालाघाट के अध्यक्ष भी अशोक सिंहासने असीम मंच पर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ मॉ सरस्वती के समक्ष धूप दीप प्रज्जवलन एवं पूजा उपरांत वरिष्ठ कवि श्री पे्रमप्रकाश त्रिपाठी द्वारा मॉ सरस्वती की वंदना से किया गया। तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों को तिलक लगाकर व पुस्तक भेंट कर किया गया तथा आगंतुक अतिथियों का अभिनंदन तिलक लगाकर वनमाली सृणन केन्द्र बालाघाट द्वारा सम्मान पत्र प्रदान कर किया गया।
रचना पाठ का प्रारंभ श्रीमती प्रमिला बिजेवार द्वारा पुस्तक पर केन्द्रित रचना से किया गया उन्होंने अपनी कविता में पुस्तक की महिला का बखान करते हुए कहा
दिल की गहराइयों में उतर के देखो दोस्तो, सनेही जिंदगी की राहें दिखाती है किताबे, हर घड़ी हर पल हमारे साथ रहती है, हम से कभी नाराज नहीं होती किताबे।
इसके पश्चात श्रीमती हेमलता गेड़ाम ने अपनी महंगाई पर आधारित समसामयिक रचना का पाठ कुछ इस प्रकार किया
दीन-ओ-ईमान से भी ऊपर, पार्टी फण्ड का चंदा है, ये राजनीति का फण्डा है। व्यापारी जो रेट बढ़ाते सोने का वो अंडा है ये राजनीति का फण्डा है।
इसके पश्चात आकांक्षा पतले ने अपनी रचना कि चंद पंक्तियां कुछ इस प्रकार प्रस्तुत की
कही पर शाम ढलती है कही सूरज निकलता है, जमाने का ये पहिया देखिये ऐसा ही चलता है।। परिंदा वक्त का उड़ता किसी के हाथ आये कब सफर से थम गया जो बैठ तन्हाँ हाथ मलता है।।
इसके पश्चात बालाघाट के वरिष्ठ कवि श्री पे्रम प्रकाश त्रिपाटी जी अपनी व्यंग रचना कुछ इस प्रकार प्रस्तुत की
एक रोटी के टुकड़े के लिए, दो जवान कुत्ते को लड़ते देखा।। एक बुढ़ा कुत्ता जो उन्हें ताक रहा था, उनके कुत्तेपन को आंक रहा है, भौका गुरूराया और तुनककर बोला अरे कुत्ते की औलादो इंसान की आदत मत अपनाओ, जो भी पास हो उसे बाट के खाओ।।
इसके पश्चात कवि अशोक सागर मिश्रा ने अपनी रचना इसके उपरांत वरिष्ठ कवि श्री मुकेश चौबे जी ने अपनी रचना इस प्रकार प्रस्तुत की
वो हुनरबाज थे जो बाजी मार गए, तैरने वाले ही दरिया पार गए।। हम इसीलिये नही हारे की वो जीते, वो जीते इसीलिए है की हम हार गये।।
इसके पश्चात सुश्री अल्का चौधरी ने अपनी गजल कुछ इस तरह प्रस्तुत की
ख्वाबो से हुवी गजल लिख रही हूँ, मै अवनी से लेकर अनल लिख रही हूंँ।। बसेरा गमो का रहा साथ हर पल, भरे नैन मेरे सजल लिख रही हूँ।।
इसके पश्चात वरिष्ठ कवि युगेश चौबे जी ने अपनी रचना इस प्रकार प्रस्तुत की
अंधेरे जी लिये हंँसकर लिये हसरत उनालों की, किसे के भ्रम कहाँ लगानी,उत्फत कृणालो की।। हम तारीखिर्या में भी डिसाईड रहा सब कुछ, न जाने क्यों अभी भी है हमें दहशत उनालों की।।
इसके पश्चात श्रीमती अनुभा मुंजारे ने अपनी कविता कुछ इस प्रकार प्रस्तुत की
,कतरा-कतरा बढ़ रही है जीवन की ये धारा, इसके ना बस मेरा है और ना बस तुम्हारा।।
इसके पश्चात श्री किशोर किल्पेश्वर सागर ने अपनी चिर परिचित रचना हम बालाघाट वाले है़ पढ़मकर खूब तालियाँ लूटी। तत्पश्चात कु. दीक्षा पटले द्वारा अपनी कविता इस प्रकार पढ़ी गयी
दुनियाँ में सब कुछ संभव है, बस हौसला रख अपने अंदर, जीवन के इस चक्र में सुख-दुख तो आयेंगे, जो इनसे हार मान गये वो कभ्ज्ञी न जीत पाएंगे।।
वनमाली सृजन केंद्र बालाघाट के अध्यक्ष श्री अशोक सिंहासने असीम ने अपना एक इस गीत इस प्रकार प्रस्तुत किया
नाम नही है जीवन केवल साँसों के स्पन्दन का, जीवन तो प्रतिरूप है तेरे, मेरे प्यार के बंधन का।।
इसके पश्चात दादा राजाराम भारद्वाज जी ने अपनी रचना कुछ इस प्रकार प्रस्तुत की
अधरों में अकुलाई प्यास लिये, बाँहो में सारा आकाश लिये, माया के मधुवन में मृगजल के पीछे मन दौड़ता रहा रिस-रिस कर तन घट यह रीतता रहा।
श्रीमती मोना जैन, श्री प्रणव श्रीवास्तव, श्रीमती पे्रमलता गुप्ता, श्रीमती शालू गाँधी, कु मिश्चल जैन, प्रदीप स्वामी आदि कवियों ने काव्य पाठ कर इस कवि गोष्ठी को ऊँचाई प्रदान की।
इस अवसर पर नवोदित कवयित्री एवं साहित्य शोध समिति की कु. आकांक्षा पटले जिनकी प्रथम काव्य संग्रह मयूख साहित्य अकादमी म.प्र. एवं संस्कृति परिषद भोपाल द्वारा प्रथमकृति अनुदान योजना तहत स्वीकृत हुई है को बेटी दिवस के अवसर पर काव्य कुमुदिनी सम्मान से तथा सभी रचना पाठ करने वाले कवियों व अतिथियों को वनमाली सृजन पीठ सम्मान से सम्मानित किया गया।