मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा जिलेवार गतिविधि सिलसिला के अंतर्गत बालाघाट में साहित्यिक गोष्ठी आयोजित
बालाघाट। देश की आजादी के 75 वर्ष के अवसर अमृत महोत्सव के अंतर्गत मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश में संभागीय मुख्यालयों पर नवोदित रचनाकारों पर आधारित तलाशे जौहर कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद अब जिला मुख्यालयों पर स्थापित एवं वरिष्ठ रचनाकारों के लिए सिलसिला के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इस कड़ी का उन्नीसवां कार्यक्रम जटाशंकर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालाघाट में 4 अक्तूबर 2022 को शाम 4 बजे शेरी व अदबी नशिस्त का आयोजन ज़िला समन्वयक अशोक सिहांसने असीम के सहयोग से किया गया।
अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी के अनुसार उर्दू अकादमी द्वारा अपने जिला समन्वयकों के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत सिलसिला के अन्तर्गत व्याख्यान, विमर्श व काव्य गोष्ठियाँ आयोजित की जा रही हैं। जिला मुख्यालयों पर आयोजित होने वाली गोष्ठियों में सम्बंधित जिलों के अन्तर्गत आने वाले गाँवों, तहसीलों, बस्तियों इत्यादि के ऐसे रचनाकारों को आमंत्रित किया जा रहा है जिन्हें अभी तक अकादमी के कार्यक्रमों में प्रस्तुति का अवसर नहीं मिला है अथवा कम मिला है। इस सिलसिले के अ_ारह कार्यक्रम भोपाल, खण्डवा, विदिशा, धार, शाजापुर टीकमगढ़, सागर एवं सतना, रीवा, सतना सीधी, रायसेन, सिवनी, नरसिंहपुर नर्मदापुरम दमोह, शिवपुरी, ग्वालियर, बुरहानपुर, देवास एवं रतलाम में आयोजित हो चुके हैं और आज यह कार्यक्रम रतलाम में आयोजित हुआ जिसमें बालाघाट ज़िले के रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत प्रस्तुत कीं।
बालाघाट जिले के समन्वयक अशोक सिहांसने असीम ने बताया कि बालाघाट में आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में 10 शायरों और साहित्यकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता बालाघाट के वरिष्ठ शायर प्रो एल सी जैन ने की। मुख्य अतिथि के रूप में कबीर अंसारी मंच पर उपस्थित रहे।
जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर इस प्रकार हैं।
चिलमन न उठा रहने दे पड़ा पोशीदा भरम कुछ रह जाए।
दिल की गिरहें मत खोल शफक मुर्दे हैं दफन तहखानों में।
कबीर मोहम्मद अंसारी शफक
खुदगर्ज जमाने ने कहीं का नही छोड़ा
अपना ही हुआ चाक जिगर देख रहे हैं।
प्रो. एल सी जैन
और पास खड़ा होकर कद नापता है मेरा
उसे बताओ कि परिंदों की उड़ान देखते हैं
संजय बनोटे
ये न कहिये अज़ाब है बेटी
नेकियों का जवाब है बेटी
नूर जिसका बहार जैसा वो
घर में खिलता गुलाब है बेटी।।
शील दुबे बेहतर
मसी बनाकर है डुबोता नेह सागर में कलम को
लगता ऐसा है है गजल वो प्रेम की ही लिख रहा है।
अशोक सिहांसने असीम
वतन के जॉ निसारों को मिल कर हम शीश नवाएँ
अपने वतन की शान की खातिर जिस ने शहादत ए जाम पिया।
ऐसे जांबाज जवानों को हम श्रद्धा सुमन चढ़ाएंगे।
वतन के जॉ निसारों को मिलकर हम शीश नवाएँगे।
डॉ. सतीश चिले
पर्बतों के नाम लेकर कोहकनों में बैठेंगे
प्यास के तसब्बुर की नदियाँ बदल देंगे।
गोपाल देव नीरद
गीत गजलों को मेरे मौला वो असर दे दे
दर्दे दिल की ये क़लम मेरी दवा हो जाए।
अलका चौधरी
परिंदा वक्त का उड़ता किसी के हाथ आये कब
सफर से थम गया जो बैठ तन्हाँ हाथ मलता है
आकाँक्षा पटले आकाँक्षा
है खमोश बहुत मुद्दतें हुईं
ये शहर कुछ बोलता क्यों नहीं
प्रीति बरखा कांबले
शेरी नशिस्त का संचालन अशोक सिहांसने असीम द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अशोक सिहांसने असीम ने सभी का आभार व्यक्त किया।
अशोक सिहांसने असीम