मारपीट के 3 आरोपियों को न्यायालय उठने तक का कारावास
बालाघाट। वारासिवनी न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रीति चैतन्य चौबे की अदालत ने मारपीट के आरोप में तीन आरोपी सुखचंद महाले लोकेश महाले जितेंद्र महाले को दोषी पाते हुए अदालत उठने तक का कारावास एवं 1500 1500 रुपए के अर्थदंड से दंडित कर सजा सुनाई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 जून 2019 को रात्रि लगभग 10 बजे सुखचंद महाले अपने घर के सामने गाली गुप्तार कर रहा था। जिसमे प्रार्थी सोमारू नारबोदे ने सुखचंद महाले को गालियां देने से मना किया तो सुखचंद महाले उसे बोलने लगा कि तू उसे मना करने वाला होता कौन है यह कहकर उसे अश्लील गालियां देने लगा। जो सुनने में बुरी लग रही थी तभी प्रार्थी की बहु जीरनबाई और पत्नि धुरपताबाई ने आकर गालियां देने से मना करने लगी। जिसपर सुखचंद महाले उसका पुत्र लकेश महाले जितेन्द्र महाले तीनों गालियां देने लगे। सुखचंद महाले ने प्रार्थी सोमारू की बहु जीरनबाई को कुल्हाडी के बेसा से मारा जिससे उसके बहु के सिर में चोट लगकर खून निकला तथा उसकी पत्नि धुरपता बाई को बायें कान में चोंट लगी तभी बीच बचाव करने प्रार्थी सोमारू नारबोदे गया तो उसे भी लकेश एवं जितेन्द्र ने भी हाथ मुक्का से मारपीट कर कहा कि दोबारा उन लोगों को रोकटोक किया तो जान से खत्म कर देगें। जिसकी रिपोर्ट थाना लालबर्रा में सोमारू नरबोदे के द्वारा दर्ज कराई गई। जिस पर पुलिस के द्वारा सुखचंद पिता माया महाले उम्र 45 वर्ष लकेश पिता सुखचंद महाले उम्र 24 वर्ष जितेन्द्र पिता सुखचंद महाले उम्र 21 वर्ष तीनो निवासी ग्राम-बोरीटोला थाना लालबर्रा के खिलाफ भादवी की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जिसके बाद से उक्त मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में विचाराधीन था। जिसमें विद्वान न्यायाधीश श्रीमति प्रीति चैतन्य चौबे के द्वारा सुखचंद महाले लकेश महाले जितेन्द्र महाले तीनों निवासी ग्राम बोरीटोला थाना लालबर्रा का अपराध सिद्ध होने पर उन्हें भादवि की धारा 323 34 के तहत न्यायालय उठने तक का कारावास एवं 1500 1500 रुपये कुल 4500 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया। अर्थदण्ड की राशि अदा न करने पर सभी को एक एक माह के सश्रम कारावास से दंडित किया जाने की सजा सुनाई गई। उक्त प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी वारासिवनी राजेश कायस्थ के द्वारा की गई।