रास नहीं आ रहा प्रशासन का फसल क्षति सर्वे कार्य

 रास नहीं आ रहा प्रशासन का फसल क्षति सर्वे कार्य


बालाघाट. महिनों से फसल नुकसानी का सर्वे और क्षतिपूर्ती की गुहार लगा रहे किसानों की आवाज अब शासन प्रशासन को सुनवाई दी है। जिला प्रशासन ने वारासिवनी क्षेत्र से फसल नुकसानी का सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया है। लेकिन यह सर्वे अब किसानों को रास नहीं आ रहा है। किसान शासन प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए सर्वे कार्य को छलावा बता रहे हैं। जिनका कहना है कि सर्वे के नाम पर एक बार फिर किसानों को लालीपॉप थमाया जा रहा है, वास्तविकता में किसानों को नुकसानी का उचित मुआवजा मिल सकेगा इस पर संशय बना हुआ है।

जिले की धार्मिक नगरी रामपायली के किसानों की माने तो अकेले रामपायली क्षेत्र में ही करीब 300 से अधिक किसानों की खड़ी फसलें अतिवृष्टि और फिर मौसमी बीमारी से पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। खेतों में चार फीट के पौधे तो नजर आ रहे हैं। लेकिन उनमें दाने नहीं बन पाए हैं। अतिवृष्टि के बाद पोंगा, माहू और सावरदेही जैसी बीमारी ने फसलों को बुरी तरह से खोंखला कर दिया है। किसानों को बहुत नुकसान हुआ, वहीं प्रशासन अब जाकर सर्वे कार्य शुरू कर रहा है।

प्रशासन ने शुरू किया सर्वे कार्य

इधर वारासिवनी तहसीलदार राजेन्द्र टेकाम ने मंगलवार से वारासिवनी क्षेत्र से फसल नुकसानी का सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। तहसीलदार, पटवरी और ग्राम सेवक की टीम बनाकर रामपायली पहुंचे। यहां किसानों के साथ बैठक कर खराब फसल की जानकारी ली। वहीं खेतों में जाकर निरीक्षण भी किया। तहसीलदार ने किसानों को राहत देने हेतु खराब हुई फसलों की जानकारी देने को कहा। साथ ही पटवारी और ग्राम सेवक को एक सप्ताह में सर्वे कर खराब हुई फसलों के रकबे की जानकारी देने आदेश जारी किए। तहसीलदार ने बताया की जिले की वारासिवनी तहसील में सबसे पहले फसल संबंधित सर्वे का कार्य प्रारंभ हुआ है। इस दौरान पटवारी शांतनु दुबे, अमित भलावी, भिवगड़े के साथ ग्राम सेवक एवं कोटवार भी शामिल रहे।

किसानों ने खड़े किए सवाल

क्षेत्र के किसान मुन्नू दुबे, बालाराम सहारे, राजकुमार गोंदुड़े, बलिराम नेरकर, उमाशंकर राणा, रेखलाल पलेवार सहित दर्जनों किसानों ने प्रशासन के सर्वे कार्य पर सवाल खड़े किए हैं। जिनका कहना कि वर्तमान में फसल कटाई का समय है। सहकारी समितियों में पंजीयन भी शुरू हो गए हैं। अब जाकर सर्वे कार्य शुरू किया गया है। प्रशासन के पास अमला भी कम है। ऐसे में बहुत कम दिनों में इतनी बड़ी संख्या में किसानों का सर्वे कार्य कैसे पूरा हो सकेगा यह बड़ा सवाल है। वहीं कुछ किसानों ने रुपयों की आस में कटाई कर ली है, ऐसे किसानों के साथ कैसे न्याय किया जाएगा यह भी सवाल खड़े हो रहा है। वहीं किसान धनेन्द्र बिसेन, आलोक पटेल, सुनील राणा, मुनेन्द्र गौतम, बुधराम सहारे, श्रीराम मस्कोले, घनशयम खोबरागड़े, नंदकिशोर गजभिए, रविशंकर वैष्णव, संजय शुक्ला, कुंवर पालेवार, राजाराम पालेवार व गोल्डी भगत ने बताया कि अभी सर्वे कार्य सही से शुरू भी नहीं हुआ है और अधिकारी क्षतिपूर्ती राशि वितरण में नियमों का अडंगा बता रहे हैं। जिनका कहना है कि जिन किसानों ने फसलों का बीमा किया है, उन्हीं किसानों को क्षतिपूर्ती मिलेगी। किसानों के अनुसार क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने फसलों का बीमा नहीं करवाया है।

यहां अधिक नुकसानी

किसानों के अनुसार क्षेत्र के रामपायली, सिंगोड़ी, कटिंगटोला, रेंगाझरी, मोहगोंव, बिठली, मेहदुली, गर्रा, थानेगांव, जबराटोला, सोनझरा आदि गांव में अधिक मात्रा में किसानों की फसलें बर्बाद हुई है।

मेरी मुख्य आय खेती से ही है। एक एकड़ भूमि की फसल मौसमी बीमारी से चौपट हो गई है। तीन हजार रूपए की दवाई भी डाली, लेकिन रिज़ल्ट जीरो रहा। अब घर में खाने लायक फसल भी शायद नहीं होगी। लगता है कमाने खाने बाहर ही जाना पड़ेगा।

श्रीराम मर्सकोले, किसान रामपायली

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