फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र जारी करने दिशा-निर्देश जारी
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने बताया है कि अग्निशमन प्राधिकारियों द्वारा फायर सेफ्टी के संबंध में जारी किये जाने वाले प्रोविजनल अनापत्ति प्रमाण-पत्र संबंधी पूर्व में जारी सभी दिशा-निर्देशों को अधिक्रमित करते हुए नये निर्देश जारी कर दिये गये हैं। नगर निगमों के लिये आयुक्त नगर पालिक निगम, नगर पालिका एवं नगर परिषद के लिये संभागीय संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास, ग्रामीण क्षेत्रों के लिये कलेक्टर और छावनी परिसर क्षेत्र जबलपुर, महू, मुरार, पचमढ़ी एवं सागर के लिये अधिशासी अधिकारी को अग्निशमन प्राधिकारी घोषित किया गया है। साथ ही एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत संबंधी शहरी क्षेत्र के प्रकरणों के लिये कलेक्टर को सक्षम प्राधिकारी घोषित किया गया है।
भवनों में अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रावधानों की अनिवार्यता
राष्ट्रीय भवन संहिता में 15 मीटर से ऊँचे सभी भवन, एक तल पर 500 स्क्वायर-मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाले समस्त भवन (आवासीय एवं धार्मिक तथा सामुदायिक भवनों को छोड़ कर) कोई भी होटल/अस्पताल, जिसमें 50 से अधिक पलंग हो, को अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। पचास से कम पलंग वाले अस्पताल/होटल स्वयं नियमानुसार पंजीकृत फायर इंजीनियर का प्रमाणीकरण करेंगे तथा संचालन के लायसेंस के समय सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे। अनुमोदित सेफ्टी प्लान के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ऊर्जा विभाग के नियमों के तहत जारी विद्युत सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के बाद भवन के लिये फायर सर्टिफिकेट जारी किया जायेगा, जिसकी अवधि 3 वर्ष रहेगी। पूर्व से निर्मित भवनों के लिये अग्निशमन अधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्ति के एक माह के भीतर फायर प्लान का अनुमोदन किया जाएगा। निर्धारित 2 माह की समयावधि में यदि भवन स्वामी/भवन संचालक द्वारा फायर प्लान तैयार कर अग्निशमन प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो विलंबित समय के लिये प्रति दिन 500 रूपये की दर से और एक वर्ष के बाद एक हजार रूपये प्रति दिन की दर से दंड देय होगा।