अंसेरा के जंगल में कैमरे में कैद हुआ बाघ

 अंसेरा के जंगल में कैमरे में कैद हुआ बाघ



बालाघाट. वारासिवनी वन परिक्षेत्र में बाघ की दहशत बरकरार है। हाल ही में अंसेरा के जंगल में वन विभाग के लगाए गए कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद हुई है। इधर, ग्राम पंचायत नरोड़ी के नारवांजपार गांव की समीप लगातार बाघ की चहलकदमी हो रही है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बाघ का बस्ती की ओर आगमन होने से ग्रामीणों के दैनिक कार्य काफी प्रभावित हो रहे हैं। खासतौर पर कृषि कार्य पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। वन विभाग भी लगातार गश्त कर रहा है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की समझाइश दे रहा है।

जानकारी के अनुसार वारासिवनी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले करीब डेढ़ दर्जन ग्रामों में बाघ की दशहत बनी हुई है। जिसमें प्रमुख रुप से सिरपुर, सिर्रा, बोटेझरी, नगझर, रमरमा, शेरपार, नांदगांव, पांढरटोला, कटंगझरी, नैतरा, खुरसोड़ी, पिपरटोला, कन्हारटोला, पिपरिया, झाडग़ांव, नरोड़ी, नारवांजपार सहित समीपस्थ अन्य ग्रामों में बाघ का आतंक बना हुआ है। इन ग्रामों में ग्रामीण डर के साए में अपना जीवन जी रहे हैं। विदित हो कि बाघ पालतु मवेशियों के साथ-साथ वन्य जीवों को भी अपना शिकार बना रहा है। हाल ही में बाघ ने लालबर्रा से कटंगी मार्ग पर हिरण का शिकार किया था। वहीं नरोड़ी के जंगल में जंगली सूकर का शिकार किया है। इस तरह से बाघ का हमला पालतु मवेशियों और वन्य जीवों पर बढ़़ते ही जा रहा है।

शाम ढलने के पूर्व ही घर पहुंच रहे ग्रामीण

बाघ की दहशत के कारण अब ग्रामीण शाम ढलने के पूर्व ही अपने घरों में पहुंच जा रहे हैं। बहुत ही कम संख्या में किसान खेतों तक पहुंच रहे हैं। जिसके कारण कृषि कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। रबी की फसल को लेकर किसान काफी चितिंत हैं। मौजूदा समय में किसानों ने खेतों में चना, गेहूं, मटर, धना, अरहर सहित अन्य फसलें लगाई है। इसके अलावा रबी फसल के लिए धान की बीज बोनी का कार्य भी कर रहे हैं। जिसके चलते किसानों को खेतों तक जाना ही पड़ता है। जो किसान खेत पहुंच रहे हैं, उनकी जान भी हलक पर अटकी होती है।

वन विभाग की गश्त जारी

क्षेत्र में लगातार बाघ के मूवमेंट के चलते वन अमला गश्त कर रहा है। ग्रामीणों को समझाइश दे रहा है। हिंसक वन्यप्राणियों से बचाव के लिए ग्र्रामीणों को अलर्ट किया है। गांव में मुनादी करा रहे हैं। आवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील कर रहे हैं। इतना ही नहीं गांव में घरों के बाहर आग जलाने, पटाखे फोडऩे सहित अन्य उपाय अपनाने की अपील भी कर रहे हैं। ताकि हिंसक वन्य प्राणी गांवों के भीतर प्रवेश न कर सकें।

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