डबल मनी मामले की सीबीआई जांच- महेश सहारे

 डबल मनी मामले की सीबीआई जांच की जाये- महेश सहारे



बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में लांजी और किरनापुर क्षेत्र के अंतर्गत विगत कुछ वर्षो से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी किये गये दिशानिर्देशों एवं परिपत्रों के विपरित जनता से अत्यंत कम अवधि (दो से चार एवं छ: माह) मं रूपया दो गुना करने का प्रलोभन देकर लगभग 3,000 करोड़ रूपये की ठगी की गई है। पूर्व में इस संबंध में बालाघाट जिले के थाना लांजी में अपराध क्रमांक 17/2022 एवं 178/2022 तथा थाना किरनापुर में अपराध क्रमांक 151/2022 अनियमित जमा योजना प्रतिबध अधिनियम 2019 की धारा 21(1) एवं 21(2) तथा भा.द.सं. की धारा 420, 129 बी के अंतर्गत पंजिबद्ध करके अभियुक्तगण से कुल 10,52,77,00/रू पुलिस ने जप्त किये थे। बाद में थाना बहेला, नवेगांव एवं थाना कोतवाली बालाघाट में भी अन्य निवेषकों द्वारा शिकायत किये जाने पर पुलिस अधीक्षक बालाघाट के बताये अनुसार अब तक कुल 20 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई है और 40 से अधिक आरोपी गिरफ्तार हो चुके है। बालाघाट जिले में यह मामला डबल मनी के नाम से कुख्यात है।

रूपयों को दो गुना करने के इस अवैध धंधे के मुख्य आरोपी सोमेन्द्र कंकराने, हेमराज आमाडारे एवं अजय तिड़के के अतिरिक्त अन्य बहुत से लोग शामिल है जो पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। अभियुक्तगण द्वारा दिये गये प्रलोभन में आकर बड़ी संख्या में सेवारत एवं सेवा निवृत शासकीय कर्मचारी, राज्य एवं केन्द्रीय पुलिस बल के कर्मचारी, कुछ वकील, विभिन्न राजनैतिक दल के कार्यकर्ता, स्वास्थ्य सेवाओ ंसे जुड़े हुये व्यक्ति, पत्रकार, शिक्षक-शिक्षिका, स्व सहायता समुह एवं आंगनवाड़ी कार्यक्रम में कार्यरत महिला कार्यकर्ता, छोटे बड़े दुकनदार, व्यापारी किसान एवं मजदुरों ने अपना रूपयो दो गुना करने के लालच में अपनी जमीन तथा सोना-चांदी बेचकर, रिस्तेदारो एवं स्व-सहायता समुह से उधार लेकर, बैंको में अपना जमा रूपया निकालकर, अपनी एफडी तुड़वाकर, पर्सनल लोन लेकर, सरकारी कर्मचारीयो ने जीपीएफ ेंजमा रूपया निकालकर एवं अनेक गरीबों ने प्रधानमंत्री आवास योजना में लिे रूपये निकाल कर अभियुक्तगण के पास दलालों के माध्यम से अथवा सीधे उनमें मिलकर रूपये डबल करने के लालच में जमा किये है। पुलिस अधीक्षक बालाघाट के कथन अनुसार यह पूरा मामला 1500 करोड़ रूपये के ऊपर का है, जिसमें अब तक 20 से 25 करोड़ रूपये जप्त किये गये है। परंतु मेरा ऐसा अनुमान है कि यह पूरा मामला लगभग 3000 करोड़ रूपये से अधिक का है।

अभियुक्तगण लोगों से रूपया जमा करवा कर जमा की गइ राशि से दो-गुना राशि का बैंक चैक एक निश्चित अवधि दो से चार अथ्वा छ: माह की अवधि का लिख कर देते थे। अभियुक्तगण ने विभिन्न बैंको के 20 हजार से भी अधिक चेक निवेषकों को दिये है। बगैर लेन देन के इतनी बड़ी संख्या में बैंको द्वारा अभियुक्तगण को चैक बुक जारी करना इस बड़े आर्थिक अपराध के संबंध में इन बैंकों की भूमिका पर संदेहास्पद है इनकी भी जांच होनी चाहिये।

जनता के हजारो करोड़ रूपये(मूलधन) अभी भी अभियुक्तगण के पास जमा है, जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद भी अभियुक्तगण ने निवेषकों को उनका रूपया वापस नहीं किये है और अब माननीय म.प्र उच्च न्यायालय जबलपुर ने सोमेन्द्र कंकरायने एवं अभियुक्तगण को पूर्व में पारित जमानत के आदेश को रद्द कर दिया है। निवेषकों को उनके रूपये वापस नहीं मिलने के कारण उनमें अत्यधिक रोष है और स्थिति अत्यंत ही विष्फोटक हो गई है, लगातार एजेंटो के साथ मारपीट एवं हत्याये जैसी घटना घटित हो रही है। जनता द्वारा अभियुक्तगण के पास जमा किये गये रूपये वापस दिलया जाना आवश्यक है।

इस मामले के तार मध्यप्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ से भी जुड़े है तथा संलिप्त निक्षेपकर्ता, निक्षेप लेने वाले या अंतर्वलिप्त संपत्तियां भारत में एक से अधिक राज्यों में अवस्थित है और अंतर्वलिप्त रकम का कुल मूल्य इतना अधिक है कि वह महत्वपूर्ण रूप से लोकहित को प्रभावित करती है। ऐसी स्थिति में अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 की धारा 30 के अनुसार इन अपराधों का अन्वेषण व्यापक जनहित में सीबीआई से जाना अत्यंत आवश्यक है।

जिलाध्यक्ष

महेश सहारे

समाजवादी पार्टी बालाघाट

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