जिले में 600 हेक्टेयर में होगी काजू की खेती

 जिले में 600 हेक्टेयर में होगी काजू की खेती


बालाघाट. काजू की खेती आम के आम और गुठलियों के दाम की तरह है। भारत सरकार भी इस खेती को प्रोत्साहित कर रही है। हमारा प्रयास है कि बालाघाट में भी इसकी खेती की जाए। काजू का पेड़ सदासावली बेशर्म की तरह होता है। बालाघाट में 600 हेक्टेयर में लगाने की बात कृषि विशेषज्ञों ने कही है। जिसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम करेंगे। बालाघाट को काजू उत्पादन जिले में शामिल करने का काम करेंगे। यह बातें अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने कही। वे गुरुवार को बावनथड़ी कॉलोनी के डी-टाइप बंगला में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आम के बगीचे के बीच में काजू की खेती किया करते थे। कई बार उसमें फल आए, लेकिन प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से धीरे-धीरे इसके पेड़ कम हो गए। उन्होंने कहा कि जिस तरह अल्फाजो हापुस आम, देशी आम दशहरा से मीठेपन में 25 प्रतिशत भी नहीं होता है। बावजूद इसके उसने मार्केट को पकड़ लिया है। इसी तरह मार्केट में काजू को लाकर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। जिसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। प्रोसेसिंग यूनिट को बालाघाट में लगाने के बाद खेती करेंगे। यदि काजू का आकार बड़ा और मीठा होगा तो लोग उसे हाथो हाथ लेंगे। यह डुप्लीकेट भी नहीं होगा। इसके अलावा कार्यशाला को अन्य लोगों ने भी संबोधित किया।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यशाला काजू एवं कोको विकास निदेशालय कोचीन केरल और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने आयोजित कराई है। इस कार्यशाला में राज्यमंत्री रामकिशोर कावरे, आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन सहित अन्य बतौर अतिथि शामिल हुए। वहीं कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अपर आयुक्त डॉ. नवीन पटले, जिपं सीईओ डीएस रणदा उपस्थित थे। इस अवसर पर उप संचालक कृषि राजेश खोब्रागड़े, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. नरेश बिसेन, कृषि विज्ञान केन्द्र प्रमुख डॉ. आरएल राउत, सहायक संचालक उद्यान हरगोविंद धुवारे सहित अन्य मौजूद थे।

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