लांजी की पल्लवी को छठवें प्रयास में मिली यूपीएससी में 730वीं रैंक, रैंकिंग सुधारने दोबारा देंगी परीक्षा
लांजी, बालाघाट। संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2022 के अंतिम परिणाम मंगलवार दोपहर जारी किए। बालाघाट से इस बार लांजी तहसील के ग्राम भुरसाडोंगरी की पल्लवी विजयवंशी ने 933 में 730वीं रैंक हासिल करने में सफलता अर्जित की है। लांजी जिले का घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। ऐसे क्षेत्र से पल्लवी ने सबसे मुश्किल परीक्षा माने जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की है। परिणाम आने के बाद पल्लवी के परिवार में खुशी का माहौल है। हालांकि पल्लवी असंतुष्ट हैं। वे बोलीं-रैंकिंग सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा देंगी।
पिता बोले- कड़ी मेहनत से सफलता पाई
पिता सीएल विजयवंशी लांजी में ही सावरी खुर्द में शासकीय विद्यालय में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, माता हेमलता विजयवंशी गृहणी हैं। पल्लवी के मामा नरेंद्र धुवारे ने बताया कि पल्लवी बचपन से पढ़ाई में होशियार हैं। उसने कड़ी मेहनत से इसमें सफलता पाई है। पल्लवी की बड़ी बहन पायल धबाड़े की शादी हो चुकी है, जो वर्तमान में महाराष्ट्र के तिरोड़ा के बड़ेगांव में रहती हैं। जबकि उनका छोटा भाई प्रशांत विजयवंशी सिविल इंजीनियर है और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
मां बोलीं-बेटी की नहीं, मेरी परीक्षा थी
मां हेमलता ने बताया कि पल्लवी पिछले चार साल से दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थी। वहीं, पिता सीएल विजयवंशी ने बताया कि यह बेटी की परीक्षा नहीं बल्कि मेरी परीक्षा थी और आज मैं बेटी के साथ सफल हो गया। नरेंद्र धुवारे ने बताया कि पल्लवी ने जवाहर नवोदय विद्यालय वारासिवनी से बारहवीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने नागपुर के एक इंजीनियर कालेज से इलेक्ट्रानिक एंड कम्युनिकेशन की शिक्षा हासिल की। पल्लवी सिविल सेवाओं में जाना चाहती थी इसलिए वह पिछले चार साल से दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थी।
पल्लवी असंतुष्ट, 28 मई को दोबारा देंगी यूपीएससी
पल्लवी ने नईदुनिया से चर्चा में बताया कि यह उनका छठवां प्रयास था, जिसमें यूपीएससी में सफलता मिली है। परिवार और रिश्तेदार सभी खुश हैं और मैं भी, लेकिन मैं अपनी रैंकिंग से संतुष्ट नहीं हूं। मेरा सपना आइएएस अफसर बनने का है। इसलिए 28 मई को यूपीएससी की वर्ष 2023 को होने जा रही परीक्षा में शामिल होंगी। मेरा प्रयास रहेगा कि और अच्छी रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा करूं। मेरी इस सफलता में मेरे माता-पिता का हमेशा सहयोग मिला। मैंने इलेक्ट्रानिक एंड कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन करने के बाद पुणे में निजी कंपनी में एक साल तक बतौर साफ्टवेयर डेवलपर के रूप में कार्य किया। इसके बाद मैंने अपनी राह बदली और यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चली गई।
कैरम व मेडिटेशन पसंद
पल्लवी ने बताया कि यूपीएससी की परीक्षा का तनाव ज्यादा रहता है। पढ़ाई का तनाव या थकान होने पर कैरम खेलती हूं। इसके अलावा अपनी दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन करती थी। मेडिटेशन ने भी तनाव दूर करने में काफी मदद किया। इससे पहले के प्रयासों में मिली असफलता से कभी-कभी मन में निराशा आती थी, लेकिन मैंने अपना लक्ष्य तय कर रखा था। असफलता क्यों मिली, कहां कमी रह गई इन बिंदुओं पर फोकस किया और उन कमियों को दूर किया।