रिमझिम बारिश में वन्य प्राणियों का मिल रहा रोमांच
बालाघाट। वैसे तो अधिकांश देशी विदेशी पर्यटक बालाघाट से लगे कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में बाघ के दीदार करने जाते हंै, लेकिन लालबर्रा से सिवनी मुख्य मार्ग पर स्थित सोनेवानी का जंगल भी इससे कम नहीं है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की तरह ही यहां बाघ के दीदार हो रहे है। रिमझिम बारिश में वन्य प्राणियों के दीदार कर पर्यटक भी रोमांचित हो रहे हैं। सोमवार के दिन भी यहां पर्यटक पहुंचे। जिन्हें वन्य प्राणी विचरण करते नजर आए। बताया गया कि पर्यटकों की अच्छी संख्या होने से वन ग्रामों के करीब 10 गाइडों का यहां से रोजगार प्राप्त हो रहा है। वन परिक्षेत्र अधिकारी हर्षित सक्सेना के अनुसार पर्यटकों की मांग पर भी ही सोनेवानी को 30 जून तक खोला गया है। इसके बाद पर्यटकों का प्रवेश निषेध हो जाएगा। इस कारण पर्यटक बारिश में भी यहां भ्रमण करने पहुंच रहे हैं। 9 हजार 900 हेक्टेयर में फैला है जंगल दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा के सोनेवानी का वन्यप्राणी अनुभूति क्षेत्र सिवनी पेंच व कॉरीडोर से जुड़ा है। इस कारण अधिक संख्या में वन्यप्राणी यहां दिखाई देते हंै। सोनेवानी का जंगल 9 हजार 900 हेक्टेयर की पूरी 13 बीटे हंै। पूरे जंगल में बाघ, तेंदुआ, बायसन, नीलगाय, हिरण, सांभर, भालू, मोर, समेत अन्य वन्यप्राणी हैं। इतना लिया जाता है शुल्क वन्य प्राणियों की संख्या बढऩे से राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में इस जंगल को वन्यप्राणी अनुभूति क्षेत्र घोषित किया। इसके बाद से जंगल में पर्यटक वन्य प्राणियों के दर्शन करने लोग आते हैं। पांच साल के भीतर 1933 पर्यटक ने सैर की है। जिसमें 17 विदेशी और 1916 देशी पर्यटक शामिल है। देशी पर्यटक से 100 व विदेशी पर्यटक से 250 रुपए जंगल की सैर करने का शुल्क लिया जा रहा है। पर्यटकों के लिए सुविधाएं - - जंगल में पर्यटकों के रूकने हटमेंट यानी पर्यटक झोपड़ी। - जंगल के अंदर ब्रिटिश कालीन रेस्ट हाउस। - जिप्सी से गाइडों के घूमाने की व्यवस्था। - जंगल के अंदर सुंदर फूलों वाला गार्डन। - पयर्टक झोपड़ी में विद्युत व्यवस्था। - पर्यटकों के रूकने तीन हटमेंट। वन ग्रामों के लोगों को मिल रहा रोजगार - 10 ग्रामों के गाइडों को मिल रहा रोजगार। - रोजाना पहुंचते हैं 30 से 40 पर्यटक। - छह जिप्सी वालों को भी मिल रहा रोजगार। - एक जिप्सी में छह पर्यटक करते हैं जंगल की सैर। सोनेवानी वन्यप्राणी अनुभूति क्षेत्र में सिवनी पेंच व कॉरीडोर से जुड़ा होने से अधिक वन्यप्राणी दिखाई देते हैं। हालाकि तेज बारिश होने पर वन्य प्राणी घने जंगलों में चले जाते हैं। रोजाना पर्यटक जंगल की सैर करते है। पर्यटकों से जमा राशि विभाग के खाते में डाल दी जाती है। फिर वहां से अनुमति मिलने के बाद विकास कार्य कराए जाते हंै। हर्षित सक्सेना, रेंजर दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा