नदी की छोटी सी चढ़ाई भी नहीं चढ़ पाया घायल बाघ
बालाघाट. कान्हा नेशनल पार्क का बाघ टी-30 आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। बाघ टी-30 घायल हालत में कान्हा नेशनल पार्क से 15 किमी दूर बालाघाट जिले के कोहका बैहर गांव के पास आज 4 जून को 11 बजे के आसपास देखा गया था।जिसके बाद वन विभाग व नेशनल पार्क की टीम ने उसका रेस्क्यू किया था। उसे इलाज के लिए लाया गया था लेकिन शाम साढ़े सात बजे बाघ टी-30 की मौत हो गई।
नदी की छोड़ी सी चढ़ाई भी नहीं चढ़ पाया था बाघ
बता दें कि टी-30 नर बाघ को घायल हालत में 4 जून को एक नदी के किनारे देखा गया था। बाघ की हालत ऐसी थी कि वो नदी के किनारे की छोटी सी चढ़ाई भी घायल होने के कारण नहीं चढ़ पाया था और वहीं पर बेसुध हालत में गिर गया था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे। ग्रामीणों ने जब घायल बाघ को देखा तो वन विभाग को सूचना दी थी। सूचना मिलने के बाद वन विभाग व कान्हा नेशनल पार्क की टीम मौके पर पहुंची थी और बाघ का रेस्क्यू कर उसे इलाज के लिए लाया गया था।
नहीं बच सकी जान
घायल हालत में बाघ टी-30 को इलाज के लिए लाया गया था लेकिन इलाज के दौरान शाम करीब साढ़े सात बजे उसकी मौत हो गई। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद बाघ का अंतिम संस्कार किया जाएगा। कान्हा टाइगर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ डॉक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया कि बाघ वृद्धावस्था में था उसकी उम्र 10 साल से ज्यादा समझ आ रही है। उसके शरीर पर घाव थे और केनाइन पूरी तरह से खत्म हो गए थे। ये साफ नहीं है कि घाव कैसे हुए लेकिन वो काफी गहरे थे जिसके कारण बाघ काफी कमजोर हो गया था।