लंबे समय से मांग पूरी होने से परिवहन अधिकारियों ने शुरु की हड़ताल, लटका रहा ताला
बालाघाट। लंबे समय सात सूत्रीय मांगों को लेकर परिवहन अधिकारी सरकार को ज्ञापन समेत अन्य माध्यमों से अवगत करा रहे है लेकिन उनकी मांगों को सुन पूरी करने के बजाय परिवहन अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। जिससे नाराज हुए परिवहन अधिकारियों ने सोमवार से परिवहन कार्यालयों को बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरु कर दी है। जिसका असर जिला परिवहन कार्यालय में भी देखने को मिला है। अधिकारियों की हड़ताल से अन्य स्टाफ भी कार्यालय नहीं पहुंचा। जिससे जिला परिवहन कार्यालय में ताला बंद होने से लाइसेंस समेत अन्य परिवहन से संबंधित कार्यो के लिए परिवहन कार्यालय पहुंचे लोगों को परेशान होना पड़ा है। बता दें यह हड़ताल लंबे समय से चली तो न सिर्फ राजस्व का नुकसान होगा बल्कि लोगों को काफी समस्याओं का सामना भी करना पड़ेगा।
अनूपपुर में हुई कार्रवाई, खेदजनक
जिला परिवहन अधिकारी अनिमेष गढ़पाले ने बताया कि मध्यप्रदेश परिवहन अधिकारी संगठन द्वारा करीब सात वर्षो से अधिक समय से अपनी कुछ मांगों को उचित माध्यम व उचित स्तर पर प्रेषित की जा चुकी है लेकिन संगठन को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। किसी भी प्रकार की मांग आज तक पूरी नहीं हुई है। साथ ही जिला परिवहन कार्यालय अनूपपुर में जिला प्रशासन की टीम भेजकर निरीक्षण की आड़ में बिना किसी दोष के विभागीय अधिकारी,कर्मचारियों को आहत किया गया है। एवं अनावश्यक रुप से कारण बताओ नोटिस एवं निलंबन की कार्रवाई की गई है जो कि खेदजनक है। जिसका परिवहन संगठन कड़ा विरोध करता है।
इन मांगों को नहीं हो रहा निराकरण
हड़ताल के दौरान जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि उनकी सात सूत्रीय मांगों में जिला परिवहन कार्यालय अनूपपुर हुई कार्रवाई को तत्काल वापस लेने,पिछले कई कार्यक्रमों के लिए अधिग्रहण की जाने बसों का भुगतान लंबित होने से बस मालिकों द्वारा कार्यक्रमों के लिए बसो को उपलब्ध कराने में ससमर्थता जाहिर कर रहे है जिसका निराकरण किया जाए,मध्यप्रदेश परिवहन अधिकारियों का सात वर्षो से अधिक समय से वेतन विसंगति को दूर नहीं किया जा रहा है जिसे त्वरित पूर्ण करने,विभागीय स्तर पर केवल उप परिवहन आयुक्त तक ही पदोन्नति की जा सकती है जो वर्तमान भर्ती नियमों के तहत की जाएगी। एक स्तर पर जाकर पदोन्नति मिलना बंद होने से पदोन्नति अवरोध हो जाती है। इसके लिए कैडर रिव्यू किए जाने की आवश्यकता है।किसी भी यात्री बस के दुर्घटनाग्रस्त होने पर आरटीओ को उत्तरदायी माना लिया जाता है और आरटीओ को निलंबित कर दिया जाता है जबकि आरटीओ के पास कार्यालय स्तर पर प्रवर्तन अमला नहीं है। कई कार्यालय में एक या दो कर्मचारी और अधिकतम परिवहन कार्यालयों में चार कर्मचारी है। जिन्हें प्रवर्तन कार्य पर ले जाने पर कार्यालय का कार्य पूर्ण रुप से बंद हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में आरअीटो पर की जाने वाली कार्यवाही पूर्णत: गलत है। जिला स्तर पर अनावश्यक एवं अन्य विभागीय कार्य में आरटीओ को शामिल किया जाता है। जिसे भी तत्काल बंद किया जाना चाहिए।