विश्व आदिवासी दिवस-आदिवास समाज ने निकाली जन आक्रोश रैली

 विश्व आदिवासी दिवस-आदिवास समाज ने निकाली जन आक्रोश रैली


  बालाघाट. विश्व आदिवासी दिवस पर सकल आदिवासी समाज ने आक्रोश रैली निकाली। यह प्रदर्शन जिला मुख्यालय में किया गया। इसके अलावा जिले के ग्रामीण अंचलों में भी आदिवासी समाज ने प्रदर्शन किया। एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे हिंसा का विरोध जताया। ज्ञापन सौंपकर हिंसा को रोके जाने और आरोपियों पर कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की।

  9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। इस बार आदिवासी दिवस के दिन खुशियां नहीं मनाई। बल्कि रैली निकालकर आक्रोश जाहिर किया। आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों पर अंकुश नहीं लगाने के मामले में केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी भी जाहिर की। बालाघाट मुख्यालय में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया गया। जन आक्रोश रैली 9 अगस्त को सुबह करीब 10.30 बजे वारासिवनी रोड स्थित वीरांगना दुर्गावती भवन से शुरु हुई। जो वीरांगना दुर्गावती चौक पहुंची, पूजा-पाठ की गई। इसके बाद यह रैली अंबेडकर चौक से हनुमान चौक, महावीर चौक, कालीपुतली, चौक अवंती चौक होते हुए जयस्तंभ चौक पहुंची। जहां से कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया। आक्रोश रैली में सभी उम्र के लोग शामिल थे। रैली के नगर भ्रमण के दौरान चौराहे पर लगी महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया गया। इस आक्रोश रैली में आदिवासी समाज ने अपनी वेशभूषा और तीर-कमान व अन्य अस्त्र.शस्त्र के साथ प्रदर्शन किया।

  स्थानीय आंबेडकर चौक में जनसभा को जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष व बैहर विधायक संजय उइके, मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष दिनेश धुर्वे, युवा जिलाध्यक्ष शुभम उईके सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि मणिपुर में महिलाओं की नग्न परेड कराना मानवता और लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली घटना है। सिवनी में मॉब लिंचिंग, नेमावर, सीधी के मूत्र विसर्जन, एसडीएम के आदिवासी छात्राओं के साथ अश्लील हरकत सहित ऐसे अनेक घटनाएं हैं जो अािदवासी, अनुसूचित जाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के साथ हो रही है। इन घटनाओं से आदिवासी समाज काफी आहत है। जो अब बर्दाश्त योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों पर अत्याचार, शोषण होने के बाद भी सत्ताधारी सरकार खामोश बैठी है। आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं कर रही है। जिसके कारण आरोपियों के हौंसले बुलंद है। इसके अलावा उन्होंने अनेक बातें कही। इस अवसर पर पर आदिवासी समाज के अलावा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता भी इस प्रदर्शन में शामिल थे।

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