होम में स्टे कर पर्यटक जानेंगे देश की ग्रामींण संस्कृति

होम में स्टे कर पर्यटक जानेंगे देश की ग्रामींण संस्कृति

  बालाघाट. अपार संभावनाएं लिए मप्र के बालाघाट जिले में एतिहासिक पर्यटन और दार्शनिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। यहां देश, प्रदेश के अलावा विदेशी पर्यटक भी वन्य प्राणियों के दीदार, सैर सपाटा और प्रकृति के अनुपम सौन्दर्य का लुत्फ उठाने बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। लेकिन प्रकृति के बीच रहवास और अन्य सुविधाओं की कमी हमेंशा पर्यटकों के उत्साह और उमंग में खलल डालने काम करती आ रही हंै। इस कमी को अब होम स्टे से दूर किया जा रहा है। होम स्टे का जिले में कार्य देख रही अनुपमा एजुकेशन सोसायटी की डायरेक्टर भूमि गेडाम ने बताया कि मप्र टूरिज्म बोर्ड की होम स्टे योजना के तहत जिले के विभिन्न टूरिज्म स्थानों में करीब 20 होम स्टे स्वीकृत किए गए हैं। इनमें दो होम स्टे बनकर तैयार भी हो चुके हैं। 15 सितंबर तक पांच होम स्टे को पूर्ण किए जाने की कवायद की जा रही है। सबकुछ ठीक चला तो मुख्यमंत्री 15 सितंबर को इन होम स्टों का वर्चुअली लोकार्पण करेंगे। इसके बाद टूरिस्टों के लिए इन्हें समर्पित कर दिया जाएगा। क्या है होम स्टे योजना- मप्र टूरिज्म बोर्ड की होम स्टे योजना का उद्देश्य पर्यटकों को प्रकृति के बीच रहवास सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के साधन मुहैया कराया जाना भी है। पर्यटन स्थलों के समीप निवासरत लोगों से आवेदन करवाकर उनकी जमींन पर अनुदान में होम स्टे का निर्माण करवाए जा रहे हंै। इन होम स्टे में पर्यटक रुकेंगे, इससे हितग्राहियों को आय होगी और पर्यटकों को भी पर्यटन स्थलों के समीप कम खर्च में सुविधाएं मुहैया हो पाएगी। 

यहां बनाए जा रहे होम स्टे

  डायरेक्टर भूमि गेडाम और टूरिज्म प्रबंधक यादव ने बताया इको पर्यटन स्थल गांगुलपारा के पास तेकाड़ी, पीपरटोला और केरा में होम स्टे का निर्माण कार्य हितग्राहियों का चयन कर करवाया जा रहा है। वर्तमान समय तक दो होम स्टे पूर्ण किए जा चुके हैं। वहीं बाकी के होम स्टे का स्ट्रेक्चर तैयार करवा लिया गया है। बारिश ने साथ दिया तो शीघ्रता से शेष कार्य भी पूर्ण करवा लिए जाएंगे। 

संस्कृति को करीब से जानने मिलेगा मौका

  टूरिज्म प्रबंधक ने बताया कि हमारे देश प्रदेश की संस्कृति ही बाहर के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसे जानने और सुकून के पल बिताने पर्यटक यहां आया करते हैं। ऐसे में होम स्टे में रुककर पर्यटकों को यहां की संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा। पर्यटक गांव में इन होम स्टे में रहकर यहां के खान पान, रहन सहन, खेलकूद, नृत्य और अन्य विधाओं और परंपराओं का लुत्फ उठा सकेंगे और करीब से महसूस कर सकेंगे। सभी तरह के इंतजाम होम स्टे में करवाए जा रहे हैं।

  होम स्टे टूरिज्म बोर्ड की महत्वकांक्षी योजना है। इससे पर्यटकों के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को भी लाभ होगा। वहीं सभी सुविधाए मुहैया होने से टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। बालाघाट में दो मोह स्टे पूर्ण कर लिए गए हैं। 15 सितंबर तक पांच होम स्टे पूर्ण करने कवायद की जा रही है। भूमि गेडाम, डायरेक्टर अनुपमा एजुकेशन सोसायटी

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