बालाघाट में सीधी कांड, आदिवासी पिता-पुत्र से पैर चटवाए

 बालाघाट में सीधी कांड, आदिवासी पिता-पुत्र से पैर चटवाए


  वारासिवनी। आदिवासियों के तथाकथित अपमान के मामले ने अब पूरा राजनीतिक रंग ले लिया है। सीधी के पेशाब कांड की तरह बालाघाट में एक मामला प्रकाश में आया है। कुछ भाजपा के नेताओं के साथ शिकायत करने के लिए एसडीएम कार्यालय आए ग्राम बकेरा के पिता पुत्र घनश्याम टेकाम व राम टेकाम अपने घर से लापता हैं और उनके परिजनों ने आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष को पैर चटवाने जैसी कोई घटना होने से ही इंकार कर दिया है। आरोप झूठे पाने पर साजिश में शामिल लोगों पर और सच पाने पर आरोपितों पर हो कार्रवाई। 

आदिवासी पिता-पुत्र से पैर चटवाए

  आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष भुवनसिंह कुर्राम व अजाक्स के बालाघाट जिला अध्यक्ष घनश्याम परते ने अधिकारियों से इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवा कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।उनका कहना है कि यदि प्रकरण में सच्चाई मिलती हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और यदि झूठ पाया जाता है तो जिनने आदिवासी समुदाय को बदनाम करने के लिए साजिश रची है उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं इस मामले में जिला पंचायत सदस्य लोमहर्ष बिसेन भी एक महत्वपूर्ण निभाते हुए नजर आ रहे हैं।

 प्रदेश में आदिवासी समुदाय में रोष की लहर 

जनपद पंचायत वारासिवनी की ग्राम पंचायत बकेरा में बकरी चोरी के मामले में आदिवासी पिता पुत्र घनश्याम टेकाम व राम टेकाम से पैर चटवाने की खबर से पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज में रोष की लहर व्याप्त हो गई है।इस मामले को लेकर आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष भुवनसिंह कुर्राम ने ग्राम बकेरा का दौरा किया और पीडि़त परिवार से मिलने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पिता पुत्र उन्हें नहीं मिले। पर उनके परिजनों ने उन्हें बताया कि पैर चटवाने जैसी कोई भी घटना ग्राम में नहीं घटी है। 

बकरी चोरी जरूर हुई , जिसमें मारपीट नहीं सिर्फ गाली गलौच हुई

  बकरी चोरी का मामला जरूर हुआ है, जिसमें मारपीट भी नहीं हुई सिर्फ गाली गलौच हुई हैं।उन्हें पता चला कि बकरी के गुमने की घटना की शिकायत हुई थी और बकरियां मिल भी गई थी।चूंकि गांव के कुछ लोगों ने राजनैतिक लाभ के लिए जिस प्रकार से पिता पुत्र घनश्याम टेकाम और राम टेकाम को मोहरा बनाया और बहला फुसला कर ले जाया गया और उन्हें बताया गया कि जमीन के मामले या आदिवासी कार्यक्रम में ले जाने लिए कहा गया और विजय बिसेन, मनोज बोपचे, चौबे अधिवक्ता द्वारा फर्जी तरीके से ज्ञापन तैयार किया गया और षडयंत्र के तहत एसडीएम के पास पेश किया गया और उसे वायरल किया गया।जिससे पूरे देश के आदिवासी समाज को आघात पहुचाया गया है। जिसके लिए आदिवासी समाज पर हुए अत्याचार के मामले में सभी जगह से फोन आ रहे हैं कि आपके गृह जिले में क्या हो रहा है इसीलिए वह ग्राउंड जीरो पर मामले की हकीकत जानने पहुंचे थे। 

षडय़त्र रचने वालों पर हो एक्स्ट्रो सिटी एक्ट के तहत कार्रवाई

  आदिवासी समाज के लोगों को मोहरा बनाकर षडयंत्र रचने वाले लोगों पर जांच उपरांत कड़ी कार्रवाई करते हुए दोषियों पर एस्ट्रो सिटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। भुवनसिंह कुर्राम कुर्राम ने बताया कि इस मामले में आदिवासी परिवार को मोहरा बना कर आदिवासियों को बदनाम करने का प्रयास किया गया हैं।इसीलिए हमने एसडीएम वारासिवनी से मिलकर उनसे मामले की निष्पक्ष जांच करने के लिए कहने आए थे, लेकिन एसडीएम नहीं हैं। इसके लिए कलेक्टर बालाघाट से मिलकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। 

ऐसा है मामला

  गुरुवार को आदिवासियों के साथ आए ग्राम बकेरा के अक्षय उइके ने बताया कि मुझे यह बोलकर लाया गया थ कि उनके जंगल वाली भूमि का मामला है। जंगल वालों ने उनकी भूमि पर रोक लगा दी थी। मुझे आने में देर हो गई थी, जब मैं पहुंचा तो यह लोग चौबे अधिवक्ता के घर में बैठे थे। वहां पर हमारे समुदाय के कुछ लोग बैठे हुए थे।जहां पर मनोज बोपचे व विजय बिसेन ने वकील चौबे से कह रहे थे कि इनको ऐसे बोलने बोलना कि मेरे को पैर चटवाए व मारपीट किए। फिर मैंने आवेदन पढ़ा तो उसमें लिखा था कि मारपीट किए गाली गलौच किए तो मैंने इसका विरोध किया। अक्षय ने कहा कि इस बात की जानकारी मैंने गांव में जाकर ग्रामीणों को दी कि यह दोनों आदिवासी को गलत बात में फंसा रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

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